यूपी में जब्त वाहनों के लिए बनेंगे डंपिंग यार्ड, पांच जिलों को 6 करोड़ मंजूर

लखनऊ
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य में परिवहन और यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के मंडलीय मुख्यालयों पर जब्त एवं चालान किए गए वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष 'डिटेंशन/डंपिंग यार्ड' विकसित किए जा रहे हैं। प्रथम चरण के तहत राज्य के पांच प्रमुख जिलों में इन यार्डों के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था सीएनडीएस (CNDS) को 6.03 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

किन जिलों को मिली कितनी धनराशि?
परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बुलंदशहर, शामली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बाराबंकी में डिटेंशन यार्ड के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार द्वारा बाराबंकी को 1.62 करोड़, पीलीभीत को 1.44 करोड़ और शाहजहांपुर को दूसरी व अंतिम किस्त के रूप में 1.34 करोड़ की स्वीकृति दी जा चुकी है (जिसमें भूमि समतलीकरण हेतु 16.04 लाख भी शामिल हैं)। स्वीकृत धनराशि को निर्माण एजेंसी के खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया जारी है।

लखनऊ और औरैया में मिली नि:शुल्क भूमि, प्रशासनिक मंजूरी जारी
परिवहन विभाग ने राजधानी लखनऊ और औरैया में भी यार्ड बनाने का काम आगे बढ़ाया है, जहां सरकार को नि:शुल्क भूमि प्राप्त हो चुकी है। लखनऊ यार्ड के लिए 2.55 करोड़ और औरैया के लिए 4.07 करोड़ की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करते हुए बजट कार्यदायी संस्था को भेज दिया गया है। इसके अलावा, उन्नाव और अलीगढ़ में भी जमीन उपलब्ध हो जाने के बाद लागत का आकलन (Estimates) तैयार कर शासन को अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।

थानों में जगह की कमी और वाहनों को छोड़ने की मजबूरी होगी खत्म
अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि वर्तमान में जांच या प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान पकड़े गए वाहनों को रखने के लिए थानों में पर्याप्त जगह नहीं होती है। इस वजह से कई बार गंभीर उल्लंघनों के बावजूद वाहनों का केवल चालान करके छोड़ना पड़ता था। सुरक्षित स्थान की अनुपलब्धता प्रवर्तन टीमों के लिए एक बड़ी बाधा थी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति की सिफारिश पर अब मंडल स्तर पर ये समर्पित डंपिंग यार्ड तैयार किए जा रहे हैं।

डिजिटल ट्रैकिंग और बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन से मिलेगी मजबूती
इन डिटेंशन यार्डों के बन जाने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर बेतरतीब खड़े जब्त वाहनों की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। परिवहन विभाग अब जब्त वाहनों का रखरखाव, 24×7 डिजिटल निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ कर सकेगा। योगी सरकार के इस कदम से न केवल परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई को बल मिलेगा, बल्कि प्रदेश में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी कड़ा अंकुश लगाया जा सकेगा।

 

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