Punjab SIR प्रक्रिया पूरी: 13 लाख वोटर नाम संदिग्ध, 879 नए पोलिंग बूथ भी बनेंगे

चंडीगढ़.

पंजाब ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। चुनाव आयोग के इस विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। अभियान के दौरान राज्यभर में मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के लिए मृतक, दोहरी प्रविष्टि वाले तथा स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं की पहचान की गई।

इसी प्रक्रिया के बाद राज्य में 879 नए मतदान केंद्र बनाए जाएंगे, जबकि मतदाताओं की संख्या और भौगोलिक जरूरतों के अनुसार करीब 25 प्रतिशत मतदान केंद्रों का पुनर्गठन भी किया गया है। राज्य में कुल 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 043 मतदाताओं की मैपिंग की गई। पश्चिम बंगाल में एसआइआर के बाद बड़े पैमाने पर वोट कटने की आशंकाओं के चलते पंजाब में भी लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन चुनाव आयोग का दावा है कि पंजाब में यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी की गई। अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में ऐसे मतदाताओं का प्रतिशत कम रहा, जिनकी प्रविष्टियां मृतक, स्थान परिवर्तन या दोहरी वोट के कारण चिन्हित हुईं। चुनाव कार्यालय के अनुसार सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण भी पूरा कर लिया गया है।

12.95 लाख मतदाताओं को जाएगा नोटिस
एसआइआर के दौरान करीब 12.95 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है, जिन्हें प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकें। राज्य में पहले 24,453 मतदान केंद्र थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 25,332 हो जाएगी। मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने स्पष्ट किया कि एसआइआर का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का मतदान अधिकार समाप्त करना नहीं है। इसका मकसद केवल मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत स्थान बदल चुके मतदाताओं का रिकॉर्ड अद्यतन किया जाता है। रेल कोच फैक्टरी, थर्मल प्लांट और एनएफएल जैसे संस्थानों में मतदाताओं के स्थानांतरण या संख्या कम होने के कारण कुछ मतदान केंद्र बंद किए गए हैं।

कुछ शहरों में 15% तक मिले मृतक
लुधियाना, मोहाली, जालंधर, अमृतसर और पटियाला विधानसभा क्षेत्रों में एसआइआर के दौरान मृतक, दोहरी प्रविष्टि और स्थान बदल चुके मतदाताओं की पहचान 15 प्रतिशत तक रही। जबकि राज्य के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में यह आंकड़ा 9.65 प्रतिशत दर्ज किया गया। चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के लिए अपनाई गई है।

इन जिलों में सबसे कम रही डिलीशन
मानसा : 3.70 प्रतिशत
मालेरकोटला : 5.77 प्रतिशत
संगरूर : 5.84 प्रतिशत

इनमें मृतक, दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से जा चुके तथा दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता शामिल हैं।

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