कौलेश्वरी मंदिर मार्ग पर बनेगी नई पीसीसी सड़क, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत जल्द

 चतरा
 प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल कौलेश्वरी पर्वत आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जल्द ही आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है। कालेश्वरी मंदिर तक पहुंचने वाले फारेस्ट के प्रमुख मार्ग को सुगम बनाने की दिशा में उत्तरी वन प्रमंडल ने महत्वपूर्ण पहल की है।

इसके तहत जूठा से बेलतरनी तक 2.8 किलोमीटर लंबी एवं 12 फीट चौड़ी पीसीसी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को भेज दिया गया है।

प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्तमान में इस मार्ग की स्थिति कई स्थानों पर खराब है। कच्ची होने के कारण बरसात में और बदतर हो जाती है। जिससे श्रद्धालुओं, स्थानीय ग्रामीणों तथा पर्यटकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सड़क बनने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। कालेश्वरी पर्वत झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। जहां साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चैत्र नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

कौलेश्वरी मंदिर विकास समिति के सदस्य अमरेंद्र कुमार केसरी कहते हैं कि चैत्र नवरात्र में दस दिवसीय मेला का आयोजन होता है। उस दौरान आठ से दस लाख श्रद्धालु यहां आते हैं।

उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अच्छी खासी रहती है। आगे कहा कि बेहतर सड़क सुविधा की लंबे समय से मांग की जा रही है। उनका कहना है कि सड़क बनने से कालेश्वरी आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी।

साथ ही आसपास के गांवों के लोगों को भी बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। लोगों ने उम्मीद जताई कि परियोजना को शीघ्र मंजूरी मिलेगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

जूठा से बेलतरनी तक पीसीसी सड़क निर्माण के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर पीसीसीएफ को भेजा गया है। प्रस्ताव में 2.8 किलोमीटर लंबी एवं 12 फीट चौड़ी सड़क के निर्माण का प्रावधान किया गया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। सड़क फारेस्ट की है। वर्तमान समय में कच्ची है। बरसात के बाद हर साल मिट्टी और मोरम डाल कर ठीक किया जाता है। पीसीसी का निर्माण हो जाने से स्थायी निदान हो जाएगा। -राहुल मीना, उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी, चतरा।

 

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