जयपुर
राजस्थान में सरकारी स्कूलों के मासूम बच्चों के दूध पर डाका डाला जा रहा है. मिड डे मील का सरकारी दूध पाउडर बाजार में बेचने का बड़ा खुलासा हुआ है. स्कूल के बच्चों का यह दूध पाउडर चोरी छिपे मावा भट्टियों तक पहुंचाया रहा है. जयपुर के सामोद इलाके में 3 हजार किलो दूध पाउडर से भरी पिकअप जब्त होने के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मचा हुआ है. पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. बताया जा रहा है कि अप्रैल से स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं मिल रहा था. यह दूध ‘पन्नाधाय बाल गोपाल योजना’ के तहत स्कूलों में बच्चों को दिया जाता है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह दूध पाउडर स्कूलों में वितरण के बजाय मावा भट्टियों तक पहुंचाया जा रहा था. जबकि पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत यह दूध पाउडर केवल सरकारी विद्यालयों के बच्चों को नि:शुल्क वितरण के लिए होता है और इसे बाजार में बेचना प्रतिबंधित है. डीएसटी टीम और सामोद थाना पुलिस टीम ने बुधवार को संयुक्त रूप से इस कार्रवाई का अंजाम दिया था. पुलिस ने मौके से कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
कई स्कूलों में बच्चों को दूध उपलब्ध नहीं हो रहा
बताया जा रहा है कि अप्रैल माह के बाद से कई स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील के साथ मिलने वाला दूध उपलब्ध नहीं हो रहा था. बरामद दूध पाउडर के पैकेट श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और जयपुर डेयरी से निर्मित बताए जा रहे हैं. पुलिस ने संबंधित विभागों को मामले की सूचना दे दी है. उसके बाद इस मामले में आरसीडीएफ (राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन) ने बड़ा एक्शन लिया है. मामले की जानकारी मिलते ही आरसीडीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सामोद थाने में एफाआईआर दर्ज कराई है।
बच्चों के हक का दूध पाउडर सप्लाई चेन से बाहर कैसे पहुंचा?
सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार बच्चों के हक का दूध पाउडर सप्लाई चेन से बाहर कैसे पहुंचा? इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है. बहरहाल पुलिस प्रशासन पूरे मामले की जड़ें खोदने में जुटा है. वहीं आरसीडीएफ ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. RCDF की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस साक्ष्य जुटाने और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।









