राजस्थान ने फसल बीमा योजना में सुधार के लिए केंद्र को भेजे 11 सुझाव

जयपुर
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अधिक पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए राजस्थान सरकार ने केंद्र को 11 बड़े सुधार सुझाव भेजे हैं। इनमें ऋणी किसानों के खातों से बिना सहमति प्रीमियम कटौती पर रोक, खेत स्तर पर नुकसान का आकलन और क्लेम भुगतान में देरी पर बीमा कंपनियों पर स्वतः ब्याज लगाने जैसे प्रस्ताव शामिल है। मंजूरी मिलने पर किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। राज्य सरकार इससे पहले बीमा कंपनियों के साथ अनुबंध में भी कई कड़ी शर्ते जोड़ चुकी है। अब राष्ट्रीय स्तर पर योजना में बदलाव की पहल की गई है।

कृषि विभाग ने किसान संगठनों, किसान प्रतिनिधियों तथा विभागीय अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के फसल बीमा सीईओ को प्रस्ताव भेजे हैं। राजस्थान पत्रिका भी लगातार योजना की विसंगतियों का मुद्दा उठाता रहा है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने पत्र में कहा है कि फसल कटाई प्रयोगों में अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रत्येक किसान के खेत को इकाई मानकर तकनीक आधारित नुकसान आकलन किया जाए। इससे मनमाने मूल्यांकन पर रोक लगेगी।

केन्द्र को भेजे गए प्रमुख सुझाव
1. ऋणी किसानों का बीमा भी पूरी तरह स्वैच्छिक हो, बिना सहमति प्रीमियम न कटे।
2. सभी किसानों का फसल बीमा एग्रीस्टैंक आईडी से जोड़ा जाए।
3. आधार, एग्रीस्टैंक आइडी और जनाधार से बैंक विवरण एनसीआईपी पोर्टल पर स्वतः उपलब्ध हों।
4. ई-गिरदावरी/क्रॉप बुकिंग ऐप से बोई गई फसल का सत्यापन कर पॉलिसी अनुमोदित हो।
5. प्रत्येक किसान के खेत स्तर पर तकनीक आधारित नुकसान आकलन कर क्लेम तय हो।
6. एड-ऑन कवर क्लेम के लिए तकनीक आधारित मानक तय हो।
7. क्लेम भुगतान में देरी पर बीमा कंपनियों पर ब्याज या पेनल्टी लगे।
8. पॉलिसी निरस्त होने पर प्रीमियम ब्याज सहित लौटाया जाए।
9. राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति में किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पड़ताल में सामने आया था कि राजस्थान का 64 प्रतिशत कृषि क्षेत्र अब भी फसल बीमा से बाहर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के कुल कृषि क्षेत्र का सिर्फ 36 प्रतिशत हिस्सा ही बीमित हो सका। सबसे अधिक कवरेज चूरू में 77 प्रतिशत रही, जबकि धौलपुर में यह महज 5 प्रतिशत, करौली में 7 प्रतिशत और दौसा में 9 प्रतिशत दर्ज की गई।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्ष में किसानों को 18,189.16 करोड़ का बीमा दावा मिला। सबसे अधिक भुगतान चूरू जिले में 2,459.63 करोड़, हनुमानगढ़ जिले में 2,253.59 करोड़, जोधपुर जिले में 1,570.94 करोड़, जालोर जिले में 1,392.02 करोड़, नागौर जिले में 1,287.89 करोड़ और बीकानेर जिले में 1,101.64 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, राजसमंद 4.66 करोड़, धौलपुर 7.23 करोड़ और करौली 9.51 करोड़ के साथ सबसे पीछे रहे।

बीमा कंपनियों को 8,568.40 करोड़ रुपए का मुनाफा
पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 26,757.56 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा हुआ। इसमें किसानों का अंश 4,650.78 करोड़, राज्य सरकार का 11,253.68 करोड़ और केंद्र सरकार का 10,853.10 करोड़ रुपए रहा। इसी अवधि में किसानों को 18,189.16 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। ऐसे में बीमा कंपनियों ने 8,568.40 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786