गोसंरक्षण से ग्रामीण समृद्धि: उत्तर प्रदेश का बहुआयामी विकास मॉडल दिनेश सिंह

लखनऊ 

किसी भी सरकार की नीति और उसकी नीयत का वास्तविक मूल्यांकन उसके धरातली परिणामों से होता है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोसंरक्षण को लेकर अपनाई गई रणनीति आज केवल एक धार्मिक या सामाजिक उत्तरदायित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और स्थानीय रोजगार का एक सशक्त आधार बनकर उभरी है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है। पहले निराश्रित गोवंश और उससे फसलों को होने वाला नुकसान एक गंभीर ग्रामीण चुनौती था। लेकिन नीति को सही नीयत से जोड़ते हुए राज्य सरकार ने इसे अवसर में बदल दिया। साढ़े सात हजार से अधिक गो-आश्रय स्थलों में 12 लाख से अधिक गोवंश का संरक्षण कर यूपी ने देश के सबसे बड़े गोसंरक्षण अभियान की नींव रखी। प्रति पशु दैनिक पोषण सहायता राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये करना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 1.14 लाख से अधिक पशुपालकों के खातों में पारदर्शी वित्तीय मदद पहुंचाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रतिबद्धता कैसी होनी चाहिए।

लेकिन इस मॉडल की असली खूबसूरती इसके 'इकोनॉमिक-चक्र' (आर्थिक चक्र) में है। गोशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र न मानकर उन्हें ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में ढाला जा रहा है। गोबर और गोमूत्र से गो-काष्ठ, वर्मी-कम्पोस्ट, गो-पेंट, धूपबत्ती, पंचगव्य और जीवामृत जैसे उत्पाद तैयार हो रहे हैं। इनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया है।

इसके साथ ही, राज्य गोबर को हरित ऊर्जा में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है। फिक्स और पोर्टेबल बायोगैस संयंत्रों की योजना और आईआईटी दिल्ली के सहयोग से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने की पहल से गांवों में स्थानीय स्तर पर नए रोजगार निर्मित होंगे। गंगा तटीय जिलों से लेकर बुंदेलखंड तक प्राकृतिक खेती का विस्तार रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर खेती की लागत घटा रहा है और मिट्टी की सेहत सुधार रहा है।

आज स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश का यह गो-आधारित मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक 'रोल मॉडल' बन चुका है। गुजरात, हरियाणा, केरल सहित 15 राज्यों के प्रतिनिधि यूपी से गोशाला प्रबंधन सीख रहे हैं, जबकि राज्य के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग वैश्विक स्तर पर अमेरिका और यूरोपीय देशों तक पहुंच रही है। संक्षेप में कहें तो, उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि अगर दृष्टि दूरदर्शी हो, तो परंपरा और आधुनिक तकनीक का मिलन ग्रामीण समृद्धि का नया इतिहास लिख सकता है। गोसंरक्षण का यह यूपी मॉडल अब सिर्फ पशुपालन की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में आत्मनिर्भर गांव का एक व्यावहारिक मार्गदर्शक है।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786