लुधियाना
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर जारी अंदरूनी खींचतान के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता भारत भूषण आशु की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
आशु ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की तस्वीर साझा करते हुए पंजाबी में लिखा, "सारा पंजाब चन्नी नाल" यानी "सारा पंजाब चन्नी के साथ"। पोस्ट में चन्नी की बड़ी तस्वीर के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। इससे यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि चन्नी को पार्टी के भीतर व्यापक समर्थन हासिल है। यह पोस्ट ऐसे समय सामने आई है, जब पंजाब कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद और गुटबाजी की चर्चाएं तेज हैं।
बता दें कि भारत भूषण आशु की पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के साथ नजदीकियां हाई कमान को भली भांति मालूम है और आशु चन्नी गुट के अहम चेहरा माने जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पोस्ट चन्नी खेमे की ताकत दिखाने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का प्रयास हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस पोस्ट को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन आशु की इस पोस्ट ने पंजाब कांग्रेस के अंदर चल रही सियासी हलचल को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस तरह के राजनीतिक संकेतों को किस तरह देखता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
राहुल गांधी के सामने पंजाब की रिपोर्ट पेश करेंगे खड़गे
कांग्रेस प्रमुख व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विदेश से लौट चुके हैं और आज उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मीटिंग हो सकती है। खड़गे पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट राहुल गांधी के सामने रख सकते हैं।
भूपेश बघेल ने पंजाब के छह दिवसीय दौरे की रिपोर्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपल को सौंप दी थी। केसी वेणुगोपाल पंजाब की रिपोर्ट पर अध्यक्ष खड़गे के साथ चर्चा कर चुके हैं और अब दोनों मिलकर इसे राहुल गांधी के सामने रखेंगे।
राहुल गांधी बघेल की रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लेंगे और उसके बाद पंजाब में कांग्रेस का भविष्य तय होगा। हालांकि भूपेश बघेल ने एक दिन पहले ही ट्वीट करके कहा है कि पंजाब में कोई सीएम फेस नहीं होगा। राहुल गांधी के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा।
उधर, चरणजीत सिंह चन्नी खेमा भी आज या कल में दिल्ली कूच कर सकता है, ताकि राहुल गांधी से टाइम मिलते ही मीटिंग की जा सके। चन्नी खेमे को राहुल गांधी से मीटिंग मिलने का इंतजार है।
चन्नी खेमा हाईकमान से मीटिंग की जिद पर अड़ा
पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने चन्नी गुट के साथ पंजाब दौरे के आखिरी मीटिंग की। मीटिंग में चन्नी गुट के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें राजा वडिंग का नेतृत्व पसंद नहीं है। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने यहां तक कह दिया कि कंप्रोाइज्ड नेता पार्टी को नहीं चाहिए। प्रताप बाजवा ने कहा कि हाईकमान को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ और बघेल पंजाब कांग्रेस को गुटबाजी के हाल में छोड़कर दिल्ली चले गए। चन्नी खेमा अब इस मामले को लेकर पार्टी सुप्रीमो राहुल गांधी से मिलने की जिद पर अड़ा है। फिलहाल चन्नी गुट के सभी नेता चुप है और उन्होंने पूरा फोकस राहुल गांधी के साथ होने वाली मीटिंग पर कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक चन्नी गुट के शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि राहुल गांधी की मीटिंग तो मीडिया से इस मुद्दे पर बात न की जाए।
पंजाब कांग्रेस में चल रही बगावत में अब तक क्या हुआ सिलसिलेवार जानिए…
विवाद की शुरुआत और दिल्ली में बैठकों का दौर: विवाद की मुख्य जड़ अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने की मांग से शुरू हुई। पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा वडिंग को बदलने की पैरवी कर रहा था। मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली में बैठकों का लंबा दौर चला। कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब की जमीनी हकीकत और नेताओं की नब्ज टटोलने के लिए तीन आब्जर्वर नियुक्त किए। इन आब्जर्वर्स ने पंजाब कांग्रेस के 60 से ज्यादा छोटे-बड़े नेताओं से वन-टू-वन फीडबैक लिया ताकि अंदरूनी कलह को शांत किया जा सके।
नई कमेटियों का गठन: पंजाब के नेताओं से मीटिंग करने के बाद हाईकमान ने विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया। जैसे ही कमेटियों की लिस्ट बाहर आई पंजाब कांग्रेस में बगावत की आहट शुरू हो गई। राजा वडिंग को प्रधान बनाए रखने से कांग्रेस के ज्यादातर सीनियर लीडर विरोध में खड़े हो गए। नाराज नेता तुरंत चन्नी के घर पर एकजुट हुए और उन्होंने राजा वडिंग को प्रधान मानने से साफ इनकार कर दिया।
सुखजिंदर रंधावा की दिल्ली दौड़: इसी तनातनी के बीच कोर कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा अचानक दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हालांकि रंधावा ने इसे पंजाब के लॉ एंड ऑर्डर से जुड़ी मुलाकात बताया, लेकिन कांग्रेस के भीतर इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया और हाईकमान की चिंताएं बढ़ गईं।
बघेल की एंट्री और चन्नी खेमे का समानांतर पावर शो: पंजाब में खुली बगावत को दबाने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को तुरंत चंडीगढ़ भेजा। चंडीगढ़ पहुंचकर बघेल ने कई नेताओं के साथ बैठकें शुरू कीं, लेकिन चन्नी खेमे ने इस आधिकारिक बैठक से पूरी दूरी बना ली।चन्नी खेमे ने बघेल की बैठक के समानांतर अपनी खुद की बैठक बुलाई और बघेल से सीधे मिलने से मना कर दिया। सीधे न मिलने की जिद पर अड़े चन्नी खेमे ने बीच का रास्ता निकालते हुए अपने दो नेताओं को बघेल से बातचीत करने का अधिकार सौंपा। कड़े गतिरोध और मान-मनौव्वल के बाद आखिरकार भूपेश बघेल की चन्नी खेमे के साथ औपचारिक मुलाकात हुई, जहां बागी नेताओं ने अपनी शिकायतें रखीं।
राजा वडिंग का शक्ति प्रदर्शन: एक तरफ जहां चन्नी गुट बगावत पर आमादा था, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग लगातार बघेल के साथ डटे रहे और उन्हें अपनी सांगठनिक ताकत दिखाते रहे। इस सियासी ड्रामे के बीच भूपेश बघेल ने कड़ा रुख अपनाते हुए बागी धड़े को दो टूक कह दिया। हाईकमान अपना फैसला किसी भी कीमत पर नहीं बदलेगा। राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस के प्रधान बने रहेंगे।
बघेल के बयान से चन्नी बैकफुट पर: बघेल पंजाब कांग्रेस की इस पुरानी और गहरी गुटबाजी को पूरी तरह खत्म करने में नाकाम रहे। वे चंडीगढ़ का दौरा पूरा कर दिल्ली लौटे और अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी। दिल्ली लौटते ही बघेल ने सोशल मीडिया (X) पर एक ऐसा ट्वीट किया जिसने चन्नी खेमे की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बघेल ने स्पष्ट कर दिया कि पंजाब का आगामी विधानसभा चुनाव केवल और केवल राहुल गांधी के चेहरे पर लड़ा जाएगा। चन्नी खेमा लगातार मांग कर रहा था कि चन्नी को पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। लेकिन हाईकमान ने राहुल गांधी के चेहरे को आगे रखकर चन्नी खेमे की इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया और उन्हें बैकफुट पर धकेल दिया है।









