तलाक के साथ पत्नी की निजी तस्वीरें भेजने पर हाई कोर्ट की टिप्पणी, कहा- ‘ऐसी गलतियां हो जाती हैं’

नई दिल्ली

 दिल्ली हाई कोर्ट में एक अजीब मामला सामने आया है। एक शख्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक की अर्जी के साथ पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें भी भेज दी। अदालत ने व्यक्ति के इस कदम पर हैरानी जताई। हालांकिइसके बावजूद पति और उसके वकील के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कृत्य गंभीर चूक की श्रेणी में आता है। लेकिन प्रतिवादी पति व वकील ने माफी मांग ली है। इसलिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई उचित नहीं है। हाई कोर्ट यह भी कहा कि इस तरह से संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सबमिट करना चाहिए।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने की। अदालत ने अपने फैसले में माना कि हालांकि इस तरह के कृत्य को खुली मंजूरी नहीं दी जा सकती। लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वैवाहिक विवाद के मामलों में इस तरह की गलतियां अकसर हो जाती हैं। इन्हें सुधारा जाना चाहिए। इस मामले में वर्ष 2015 के दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।

अदालत ने कहा- दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश होने चाहिए
उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि संवेदनशील या निजी प्रकृति के दस्तावेजों को पहले अदालत की अनुमति लेकर सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता महिला का तर्क था कि प्रतिवादियों ने फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्जी के साथ बिना किसी बदलाव के निजी तस्वीरें लगाकर उन निर्देशों का उल्लंघन किया। हालांकि हाई कोर्ट की पीठ ने गौर किया कि प्रतिवादियों का दावा है कि उन्हें उन निर्देशों की जानकारी नहीं थी।

पीठ ने कहा कि इसके अलावा जब प्रतिवादी पति व उसके वकीलों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने कार्यों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने फैमिली कोर्ट में उन तस्वीरों को सीलबंद लिफाफे में रखने के लिए एक अर्जी दाखिल की है। पीठ ने कहा कि इसे गंभीर चूक माना जा सकता है। लेकिन अवमानना की कार्रवाई शुरु करना उचित नहीं है।

अदालत ने पति को चेतावनी दी
पीठ ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि महिला से संबंधित मामलों में इस तरह की भविष्य में गलती नहीं होनी चाहिए। अवमानना ​​याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता महिला को अपनी पहचान छिपाने व संबंधित सामग्री की सुरक्षा के लिए फैमिली कोर्ट में जाने की छूट दी। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि वे तस्वीरों को खुले रिकॉर्ड से हटा दें। उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखें।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786