Good News: भारत की रफ्तार बरकरार! वर्ल्ड बैंक ने बताया दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था

 नई दिल्ली

अमेरिका-ईरान युद्ध से गहराया मिडिल ईस्ट संकट हो या फिर कोई और ग्लोबल टेंशन, तमाम चुनौतियों के बाद भी भारत रुकने वाला नहीं है. विश्व बैंक ने भी इंडियन इकोनॉमी का लोहा माना है और अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन सबके बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यस्थाओं में बना रहेगा. वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर (India Growth Rate) 6.6% होने की उम्मीद जताई गई है। 

इस रफ्तार से भागेगी इकोनॉमी
World Bank ने गुरुवार को जारी अपनी वैश्विक आर्थिक संभावनाओं पर रिपोर्ट में ये बड़ी बात कही है. विश्व बैंक ने कहा कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 6.6 फीसदी की दर से ग्रोथ करते हुए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. बीते साल इसकी रफ्तार 7.7 फीसदी रही थी, हालांकि ताजा अनुमान इससे काफी कम है। 

ग्रोथ में बीते साल के मुकाबले कमी आने के पीछे विश्व बैंक ने कारण बताते हुए कहा है कि मिडिल ईस्ट युद्ध से ऊर्जा की कीमतों आए उछाल और अन्य इनपुट लागतों के कारण निजी डिमांड में वृद्धि धीमी पड़ सकती है और इसका असर ग्रोथ रेट पर देखने को मिल सकता है। 

गिरावट के बाद उछाल की उम्मीद
विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तु एवं सेवा कर यानी GST रेट कट से उपभोक्ता मांग को कुछ हद तक समर्थन मिलना चाहिए. इसके साथ ही भारतीय अर्थव्वस्था की रफ्तार को लेकर वर्ल्ड बैंक ने आगे कहा कि 2026-27 में ग्रोथ में गिरावट के बाद अगले वित्त वर्ष 2027-28 में इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 7.2 फीसदी होने की उम्मीद है. मतलब भारत रुकने वाला नहीं है. घरेलू डिमांड में मजबूती और निर्यात वृद्धि में तेजी के चलते अगले दो वित्तीय वर्षों में विकास दर में फिर से उछाल आने की उम्मीद है। 

युद्ध भी नहीं रोक पाया डिमांड
विश्व बैंक के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष से बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद, इस वर्ष 2026 की शुरुआत में भारत में आर्थिक गतिविधि मजबूत बनी रही, जिसे लचीली घरेलू मांग का सपोर्ट मिला था. इसमें कहा गया है कि प्राइवेट कंजंप्शन, खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत रहा है, जबकि शहरी डिमांड में भी तेज सुधार देखने को मिल रहा है। 

घरेलू बिक्री से टैक्स कलेक्शन भी लगातार बढ़ा है. इसके बीच ऊर्जा की बढ़ती लागत के साथ-साथ कृषि उत्पादों, उर्वरकों की कमी से पैदा हुए दबाव को कम करने के लिए, भारत में फ्यूल टैक्ट कट समेत कई बड़े कदम भी उठाए हैं. इसके साथ ही विश्व बैंक ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ में कटौती, तमाम देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) से मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण कमजोर बाहरी डिमांड को कम करने में मदद मिली है। 

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत
मीडिया से बातचीत में वर्ल्ड बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट आयहान कोसे ने कहा कि इस दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

भारत के आर्थिक प्रदर्शन और मध्य पूर्व संकट के असर के बारे में आईएएनएस के सवाल का जवाब देते हुए, कोसे ने कहा कि बेहतर अनुमान घरेलू मांग में "उम्मीद से अधिक मजबूत गति" को दिखाता है, जो अब तक मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बुरे असर की भरपाई से कहीं ज्यादा है।

क्षेत्रीय विकास दर 7 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत होने की उम्मीद 
वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बना रहेगा। हालांकि, एनर्जी की ज्यादा कीमतों और संघर्ष के व्यापक असर के कारण 2025 में क्षेत्रीय विकास दर 7 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है।

कोस ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद भारत के आर्थिक आधार मजबूत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, "भारत ने जरूरी नीतिगत उपाय लागू किए हैं। जब हम भारत की बड़ी तस्वीर को देखते हैं, तो उसमें अभी भी जबरदस्त गति दिखाई देती है।"

वर्ल्ड बैंक ने दी चेतावनी
वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण 2026 में वैश्विक विकास दर 2025 के 2.9 प्रतिशत से घटकर 2.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से सबसे धीमी गति होगी। तेल की ज्यादा कीमतें बढ़ती महंगाई और कड़े वित्तीय हालात का असर दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की उम्मीद है।

इसके बावजूद, भारत उन कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक था जिनकी रेटिंग में सुधार हुआ। कोस ने कहा कि बेहतर आउटलुक की वजह घरेलू मांग और एक्सपोर्ट में आई तेजी थी।

उन्होंने कहा, "घरेलू मांग और एक्सपोर्ट में तेजी की वजह से उम्मीद से अधिक ग्रोथ हुई," और इसी वजह से अनुमान को बढ़ाया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लगातार विस्तार की वजह से दक्षिण एशिया दुनिया भर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बना रहेगा। इस साल सुस्ती के बाद, 2027 में क्षेत्रीय ग्रोथ के 6.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। 2028 में भारत की ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

भारत-China को छोड़ बाकी का बुरा हाल
विश्व बैंक का कहना है कि चीन और भारत को छोड़कर, विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति आय की धीमी रह सकती है. साउथ एशिया में विकास दर 2026 में घटकर 6.3 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट युद्ध के निगेटिव प्रभाव को दर्शाती है. इसमें एनर्जी कॉस्ट में तेजी, तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में कमी और पर्यटन  सेक्टर में व्यवधान शामिल हैं। 

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