गन्ना विकास विभाग के सहयोग से 3500 विद्यार्थियों को मिलेगी रोजगारपरक शिक्षा व प्लेसमेंट सहयोग

लखनऊ

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रथम चरण में सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित इंटर कालेजों एवं महाविद्यालयों के जर्जर भवनों को ठीक कराया गया। यहां अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षों का निर्माण भी कराया जा रहा है। इन कॉलेजों में दी जा रही शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के उ‌द्देश्य से चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने युवाओं को कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने वाधवानी फाउंडेशन के "स्किल्स डेवलपमेंट नेटवर्क (एसडीएन) के साथ एमओयू किया है। इसका उद्देश्य सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रदान करना है, जिससे वे रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकें।

75 से 90 घंटे का दिया जाएगा विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण

गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि प्रदेश में सहकारी गन्ना समितियों द्वारा संचालित 09 इंटर कॉलेजों/महाविद्यालयों में लगभग 15,440 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वर्तमान परिदृश्य में उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान, संचार कौशल, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान तथा कार्यस्थल के अनुरूप व्यवहार विकसित करना भी आवश्यक है। यह एमओयू इसे ध्यान में रखकर किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 3,500 विद्यार्थियों को 75 से 90 घंटे का विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत बालिकाओं के समग्र विकास व कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हें रोजगारोन्मुखी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में "एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स कार्यक्रम" के अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रभावी संचार कौशल, साक्षात्कार की तैयारी, शैक्षणिक लेखन, व्यक्तित्व विकास, प्रस्तुतिकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक नैतिकता, नेतृत्व क्षमता तथा कार्यस्थल पर अपेक्षित व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। 

शिक्षकों व विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध होगी शिक्षण सामग्री

फाउंडेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुनील दहिया ने बताया कि एआई (ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर आधारित अत्याधुनिक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) डिजिटल कंटेंट एवं इंटरएक्टिव शिक्षण सामग्री सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इस प्लेटफॉर्म पर डिजिटल कंटेंट, वीडियो लेक्चर, मूल्यांकन मॉड्यूल, अभ्यास सामग्री तथा इंटरैक्टिव शिक्षण संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक "एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट प्रोग्राम" भी होगा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित की जाएगी। कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप, व्यवसाय प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन, अवसरों की पहचान तथा स्वरोजगार के विभिन्न आयामों की जानकारी प्रदान की जाएगी। 

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ देंगे परामर्श

समय-समय पर 'राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्यशालाएं, मास्टरक्लास, करियर परामर्श सत्र भी होंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वर्तमान प्रवृत्तियों, रोजगार के अवसरों, नई तकनीकों एवं भविष्य की आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त होगी। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार एवं इंटर्नशिप के अवसरों से जोड़ना भी है। कार्यक्रम की नियमित समीक्षा भी होगी। 

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को दिया जाएगा पारितोषिक 

गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने बताया कि प्रतिभाशाली गरीब विद्यार्थियों के लिए गन्ना समितियों एवं चीनी मिलों के सहयोग से अध्ययन सामग्री-पुस्तकें व मोबाइल निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने के साथ साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टॉप 20 विद्यार्थियों को चीनी मिलों के सहयोग से पारितोषिक भी प्रदान किया जाएगा। 

इस एमओयू पर वाधवानी फाउंडेशन की ओर से कार्यकारी उपाध्यक्ष सुनील दहिया एवं गन्ना आयुक्त की ओर से डॉ. वी.बी. सिंह, अपर गन्ना आयुक्त (समितियां) द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन) अभिषेक आनंद, अपर गन्ना आयुक्त (विकास) वी.के. शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) विश्वेश कनौजिया आदि मौजूद रहे।

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