गुरुग्राम में कचरा प्रबंधन को मिलेगी रफ्तार, 606 करोड़ के टेंडर पर हाई पावर कमेटी का फैसला जल्द

गुरुग्राम.

साइबर सिटी में घर-घर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को स्थायी और बेहतर बनाने पर मंगलवार को फैसला होगा। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा जारी 606 करोड़ रुपये के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर को चंडीगढ़ में होने वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है।

वहीं, मंजूरी मिलने के बाद अगले पांच वर्षों के लिए प्राइवेट एजेंसियों को काम सौंप दिया जाएगा, जिससे शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जैसे ही बैठक में टेंडर पर मुहर लगेगी। एजेंसियां तीन महीने में काम शुरू कर देगी। नगर निगम क्षेत्र में 14 जून 2024 के बाद से कोई स्थायी एजेंसी कार्यरत नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य अस्थायी व्यवस्था के तहत विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है। स्थायी एजेंसी नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में समय पर कूड़ा उठान और निगरानी से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं।

चार जोन को दो क्लस्टर में बांटा
नई व्यवस्था के तहत नगर निगम ने शहर के चारों जोनों को दो अलग-अलग क्लस्टर में विभाजित किया है। जोन-1 और जोन-2 को एक क्लस्टर तथा जोन-3 और जोन-4 को दूसरे क्लस्टर में शामिल किया गया है। पहले क्लस्टर के लिए चार निजी एजेंसियों ने आवेदन किया है, जबकि दूसरे क्लस्टर के लिए दो एजेंसियों ने भागीदारी की है।

606 करोड़ रुपये का है टेंडर
नगर निगम ने दोनों क्लस्टरों के लिए कुल 606 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इसमें जोन-एक और जोन-दो के क्लस्टर के लिए 295 करोड़ रुपये तथा जोन-तीन और जोन-चार के क्लस्टर के लिए 311 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। टेंडर आवंटन के बाद संबंधित एजेंसियां अगले पांच वर्षों तक कूड़ा कलेक्शन का कार्य करेंगी।

गीले और सूखे कचरे के अलग संग्रह पर रहेगा जोर
नई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था में स्रोत स्तर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने पर विशेष फोकस रहेगा। निगम प्रशासन का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।

हाई पावर कमेटी देगी अंतिम मंजूरी
नगर निगम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी में टेंडर सौंपने पर निर्णय होगा। कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित एजेंसियों को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन महीने के अंदर एजेंसियां काम शुरू करेंगी।

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