हरियाली की दौड़ में यमुनानगर अव्वल, 60 लाख से ज्यादा पेड़ लगाकर बना नंबर-1 जिला

यमुना नगर.

विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा की हरियाली की तस्वीर में यमुनानगर सबसे आगे दिखाई देता है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना में जंगलों से बाहर हरियाणा में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश के 4.01 करोड़ पेड़ों में 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुना नगर में हैं, यानी प्रदेश के कुल पेडों में हर सातवां पेड़ यमुनानगर जिले का है।

वन क्षेत्र मामले में भी जिला दूसरे स्थान पर है। हालांकि बढ़ता प्रदूषण, गिरता भूजल, अवैध खनन व वनों पर बढ़ती तस्करी भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, पर इस बीच भी कलेसर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य व किसानों की कृषि वानिकी यमुनानगर को हरियाणा की हरित पहचान बना रहे हैं।

कलेसर व किसानों ने दिलाई पहचान
वन विभाग द्वारा कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार प्रदेश में जंगलों से बाहर 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ यमुनानगर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद अंबाला में 34,08,972, सिरसा में 33,18,033 और फरीदाबाद में 5,72,416 पेड़ हैं। इसके बाद कुरुक्षेत्र, पलवल और गुरुग्राम का स्थान है। पेड़ों की संख्या में यमुनानगर के आगे रहने की उपलब्धि के पीछे 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर नेशनल पार्क व वन्यजीव अभयारण्य बड़ी वजह हैं। शिवालिक की तलहटी स्थित यह क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाला वन क्षेत्र है। दूसरी ओर किसानों ने निजी भूमि पर पापलर, सफेदा व शीशम के बड़े स्तर पर रोपण कर कृषि वानिकी को नई ऊंचाई दी है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में पहचान मिली। किसान संघ के महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि किसानों की भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।

10.94% वन क्षेत्र से प्रदेश में दूसरा नंबर
भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.53 प्रतिशत है। वन क्षेत्र के मामले में पंचकूला 47.4 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ पहले स्थान पर है। यमुनानगर 10.94 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत हर साल 2.2 से 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि पौधों को जीवित रखना अभी भी चुनौती बना हुआ है। औसतन 65 से 70 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं। सड़कों व नहरों किनारे यह दर कई बार 50 से 55 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इसी कारण पौधरोपण करने वाली एजेंसियों को पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा रही है।

बढ़ रहे वाहन और गिर रहा भूजल स्तर
प्रदेश में हर साल सात से आठ लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। कुल वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। सर्दियों में जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा व गुरुग्राम जैसे शहर गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में 19,487 तालाब होने के बावजूद भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के 143 ब्लाकों में 85 से 88 ब्लाक ओवर एक्सप्लाइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर 52 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच चुका है। यमुनानगर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले में औसत भूजल स्तर 14 से 16 मीटर के बीच है, पर यहां भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

विशेषज्ञ बोले- उपलब्धि बड़ी, खतरे गंभीर
पर्यावरणविद् डा. रविश चौहान ने कहा कि यमुनानगर का पेड़ों की संख्या में प्रदेश में पहले स्थान पर होना एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। कलेसर के जंगल व किसानों की कृषि वानिकी ने जिले को विशेष पहचान दी है। लेकिन अवैध खनन, खैर कटान, भूजल दोहन व बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय हैं। यदि संरक्षण व संवर्धन साथ-साथ नहीं चले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।

श्रेणी / सूचक    आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी
प्रदेश में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)            4.01 करोड़
यमुना नगर में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)     60.94 लाख (प्रदेश के कुल पेड़ों का बड़ा हिस्सा)
वन क्षेत्र (Forest Area) में पहला स्थान        पंचकूला
वन क्षेत्र (Forest Area) में दूसरा स्थान        यमुनानगर
यमुनानगर का कुल वन क्षेत्र प्रतिशत            10.94%
हरियाणा का कुल वन क्षेत्र                           1,559 वर्ग किमी
हर साल पौधारोपण का लक्ष्य                        2.2 से 2.5 करोड़ पौधे
पौधों के जीवित रहने की दर                         65% से 70%
प्रदेश में कुल तालाबों की संख्या                    19,487
ओवर एक्सप्लाइटेड ब्लॉक (अति-दोहित क्षेत्र)   85 – 88 ब्लॉक
महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर                                  52 मीटर से अधिक गहरा
सालाना पंजीकृत होने वाले नए वाहन                7 से 8 लाख

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