बिहार की नाबालिग पीड़िता को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 2 लाख रुपये की सहायता

लखनऊ / वाराणसी,

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिला अपराध को लेकर काफी सजग और संवेदनशील है। सरकार एक तरफ महिला अपराध से जुड़े अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है,वहीं पीड़िता को आर्थिक मदद के साथ ही सामजिक संबल भी प्रदान कर रही है। ह्यूमन ट्रैकिंग के प्रति अति संवेदनशीलता के चलते वाराणसी के सारनाथ थाने की पुलिस द्वारा कथित रूप से बेची गई नाबालिग बालिका को बरामद करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वाराणसी प्रशासन द्वारा मानव तस्करी और दुष्कर्म पीड़िता बालिका को तत्काल आर्थिक मदद के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपये की सहायता का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जो तत्काल स्वीकृत हो गया। यह पहल पीड़िता को आर्थिक सहारा देने के साथ उसके पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जिलाधिकारी वाराणसी ने बताया कि बालिका को तत्काल बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर 20 मई को ही चिकित्सकीय परीक्षण कराते हुए राजकीय बाल गृह (बालिका) में रखा गया है। उन्होंने बताया कि बालिका को वहां मनोचिकित्सकों के माध्यम से काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उसे मानसिक और भावनात्मक संबल मिल सके। साथ ही, बालिका को पारिवारिक वातावरण में रखने का प्रयास किया जा रहा है तथा आवश्यक कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उसके पुनर्वास और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

पुलिस के मुताबिक मूल रूप से बिहार की रहने वाली  पीड़िता की मां ने पैसों के लालच में एक व्यक्ति से उसकी झूठी शादी करा दी थी। इस घटना में पुलिस पीड़िता की मां सहित तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। थाना सारनाथ पुलिस द्वारा मानव तस्करी उसके साथ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट के  प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की गई है।

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