नई दिल्ली
देश में बीते डेढ़ साल के दौरान एमएमएस लीक की ऐसी बाढ़ आई कि दफ्तर से लेकर बेडरूम तक होने वाली हरकतें एक झटके में सबके सामने आ गईं. लीक हुए एमएमएस सिर्फ दफ्तर और बेडरूम तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि इनकी जद कॉलेज और मेट्रो ट्रेन तक फैली हुई थी. ये हरकतें जायज थीं या नाजायज, फिलहाल यह सवाल नहीं है. सवाल यह है कि इन एमएमएस वीडियोज को लोगों के मोबाइल तक किसने और कैसे पहुंचा. इस सवाल का पूरा जवाब मिलता, इससे पहले सोशल मीडिया में सोशल मीडिया में वायरल हुए ’19 मिनट के वीडियो’ ने सिक्योरिटी एजेंसीज और साइबर एक्सपर्ट्स का भी सबका दिमाग हिला दिया .
इस वीडियो को देखने के बाद किसी आम आदमी के लिए यह अंदाजा लगाना नामुमकिन था कि वह वीडियो असली था या फिर उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किया गया था. इस वीडियो की गुत्थी सुलझती, इससे पहले ‘सीजन 5′ और ’50 मिनट के फुल वर्जन’ ने साइबर एक्सपर्ट्स को नया चैलेंज दे दिया. दरअसल, एआई के जरिए तैयार किए गए इन वीडियोज के जरिए स्कैमर्स ने लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाया. इन वीडियोज के जरिए मैलवेयर लिंक लोगों के मोबाइल तक पहुंचाए गए. इसके बाद, हजारों लोगों के फोन हैक कर बैंक अकाउंट खाली कर दिए. इसके बाद सामने आए नमो भारत ट्रेन के सीसीटीवी फुटेज लीक ने सरकारी निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए .
इन कांडों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर लीक या तो एआई से बनाए गए थे, या फिर करीबी दोस्तों ने लीक किए थे. कई लीक्स में सिक्योरिटी स्टाफ भी शामिल मिला. वीडियो को लोगों के बीच पॉपुलर करने के लिए जानी मानी महिला यूट्यूबर के चेहरे का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो वायरल किए गए. वहीं एक मामला ऐसा था कि एक पीडि़ता का वीडियो उसके ही दोस्त ने लीक कर दिया. नमो भारत ट्रेन का सीसीटीवी वीडियो एक स्टाफ ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर फैला दिया. साइबर फ्रॉड्स ने ‘ललिता’ और ‘सारा बलोच’ के नाम पर फर्जी लिंक बनाकर लोगों को खूब ठगा. कुल मिलाकर अब एमएमएस लीक अब साइबर फ्रॉड्स के लिए एक नया हथियार बन चुका है .
लोगों के दिमाग को हिला गए ये पांच बड़े कांड
कांड 1: ’19 मिनट का वीडियो’ और ‘सीजन 5’ का झांसा
नवंबर 2025 में एक 19 मिनट का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर एक बंगाली यूट्यूबर और उनकी गर्लफ्रेंड थी. देखते ही देखते दावे किए जाने लगे कि इसका ‘सीजन 5′ और ’50 मिनट का फुल वर्जन’ लीक हो गया है. साइबर जांच में खुलासा हुआ कि असलियत में कोई ‘सीजन 5’ मौजूद ही नहीं था. जो वीडियो वायरल हो रहे थे, वे एआई डीपफेक टेक्नोलॉजी से बनाए गए थे. फोरेंसिक रिपोर्ट में बताया गया कि वीडियो में चेहरे के हाव-भाव नेचुरल नहीं थे, होंठ ऑडियो से मेल नहीं खा रहे थे और लाइटिंग मिसमैच थी. जांच में यह भी सामने आया कि असली मंशा साइबर ठगी की थी. स्कैमर्स ने ‘सीजन 5’ के नाम पर फेक लिंक बनाए, जिन पर क्लिक करते ही यूजर के फोन में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता था. इससे बैंकिंग डिटेल्स, यूपीआई पिन और ओटीपी चोरी हो रहे थे .
कांड 2: नमो भारत ट्रेन का सीसीटीवी लीक
दिसंबर 2025 में गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर की नमो भारत ट्रेन का 4 मिनट 44 सेकंड का एक सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ. इसमें एक युवक और युवती ट्रेन के कोच में अंतरंग पलों में डूबे दिखे. इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी. जांच में कई चौंकाने वाला खुलासा हुए. यह वीडियो एनसीआरटीसी के ही एक स्टाफ ऋषभ ने अपने मोबाइल फोन से सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर लीक किया था. जिन लोगों पर यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही प्राइवेसी का उल्लंघन किया. एनसीआरटीसी ने आरोपी को बर्खास्त कर दिया और मुरादनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई. इस वीडियो का अंजाम और भी दर्दनाक रहा. दोनों स्टूडेंट्स कॉलेज जाना छोड़ चुके थे, डिप्रेशन में आत्महत्या का प्रयास किया. अंततः परिवारों ने दबाव में आकर दोनों की शादी करा दी गई .
कांड 3: सारा बलोच और ललिता के नाम पर डिजिटल हनी ट्रैप
फरवरी 2026 में पाकिस्तानी क्रिएटर सारा बलोच का नाम ‘असम इंसीडेंट’ से जोड़कर एक लिंक वायरल किया गया. दावा किया गया कि उनका ‘लीक एमएमएस’ वायरल हो रहा है. हकीकत में सारा बलोच का उस वीडियो से कोई लेना-देना नहीं था. यह पूरी तरह से साइबर स्कैम था, जिसमें उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों के एकाउंट साफ किए जा रहे थे. वहीं, तेलंगाना के करीमनगर में पुलिस ने ललिता और उसके पति को गिरफ्तार किया. यह दंपति सोशल मीडिया पर दोस्ती कर पुरुषों को किराए के फ्लैट पर बुलाता, जहां पति हिडन कैमरे से वीडियो रिकॉर्ड करता. फिर ब्लैकमेल कर पैसे वसूले जाते. पुलिस ने साफ किया कि ‘ललिता वायरल वीडियो’ इंटरनेट पर नहीं है, बल्कि पुलिस के मालखाने में बंद है. फिर भी स्कैमर्स ने उसी नाम से फेक लिंक बनाकर लोगों के फोन हैक करने शुरू कर दिए .
कांड 4: बंगाली यूट्यूबर के बॉयफ्रेंड ने कर दिया कांड
बंगाली महिला यूट्यूबर का 16 मिनट का एक प्राइवेट वीडियो अचानक वायरल हो गया. इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ था. तब यूट्यूबर ने खुद एक वीडियो जारी कर चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो उनके एक्स-बॉयफ्रेंड ने बदला लेने के लिए लीक किया है. यह एक ऐसा मामला था, जिसमें ब्रेकअप के बाद बदला लेने के लिए अपने ही पार्टनर के निजी पलों को पब्लिक कर दिया था. इसके बाद, यूट्यूबर का एक और वीडियो आया, जिसे स्टेज्ड और एडिटेड बताया गया, लेकिन तब तक बहुत बड़ा नुकसान हो चुका था. यूट्यूबर के लिए घर से बाहर निकलना तो छोडिए, घर के अंदर रहना भी मुश्किल हो गया था .
कांड 5: भोजपुरी स्टार का एमएमएस हुआ वायरल
नवंबर 2025 में महज 15 साल की एक भोजपुरी एक्टर का एक एमएमएस वायरल हो गया. पूरे इंटरनेट पर हड़कंप मच गया. बाद में फोरेंसिक जांच में पता चला कि यह वीडियो पूरी तरह से एआई डीपफेक था, जिसमें पीडि़ता का चेहरा किसी दूसरी बॉडी पर चिपका दिया गया था. इसकी कड़ी एक इंटरनेशनल पोर्न-बॉट नेटवर्क से जुड़ी मिली. इसी तरह, असम की महिला इन्फ्लुएंसर का भी एक वीडियो वायरल हुआ. फोरेंसिक रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि यह एआई बॉडी-स्वैप टेक्नोलॉजी से बनाया गया था. वीडियो में लाइटिंग मिसमैच थी, बैकग्राउंड अलग थे. अपनी सफाई में पीडि़ता ने कहा था कि एआई ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी .
आपके मन में उठते हर सवाल का है यहां जवाब
क्या मैं भी डीपफेक एमएमएस का शिकार हो सकता हूं?
हां, दुर्भाग्य से आप भी इसका शिकार हो सकते हैं. डीपफेक टेक्नोलॉजी आज इतनी सस्ती हो गई है कि कोई भी शख्स आपके सोशल मीडिया से कुछ तस्वीरें चोरी कर आपका अश्लील वीडियो बना सकता है. यह बनाने में उसे मुश्किल से 10-15 मिनट लगते हैं. सबसे गंभीर बात यह है कि आपको सेलिब्रिटी होने की जरूरत नहीं है. स्कैमर्स आपकी तस्वीरें भी चुराते हैं .
स्कैमर्स को हमारी तस्वीरें कहां से मिलती है. इन तस्वीरों को उन तक पहुंचने से कैसे रोका जा सकता है?
तस्वीरों की सबसे ज्यादा चोरियां व्हाट्सएप डीपी, इंस्टाग्राम स्टोरी और फेसबुक प्रोफाइल से होती है. एक बार तस्वीरें हाथ लग गई तो कोई भी उसका इस्तेमाल कर सकता है. इसलिए अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल को हमेशा प्राइवेट रखें. अनजान लोगों से दोस्ती न करें. कभी भी किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें. अगर ऐसा होता है, तो तुरंत साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं .
डीपफेक वीडियो को असली से कैसे पहचाना जा सकता है?
डीपफेक वीडियो को पहचानना काफी मुश्किल है. लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं, जिन पर गौर कर डीपफेक वीडियो को पहचाना जा सकता है. पहला चेहरे के हाव-भाव देख कर अंदाजा लागया जा सकता है. डीपफेक में चेहरा अक्सर बेजान, रोबोटिक या अप्राकृतिक लगता है. दूसरा पलकें आपको सच बता देंगी. असली इंसान नियमित रूप से पलकें झपकाता है, जबकि डीपफेक में यह अनियमित या बहुत कम होता है. तीसरा होंठ और आवाज का मेल खाना. डीपफेक में होंठ ऑडियो से मेल नहीं खाते. चौथा लाइटिंग और स्किन टोन. अगर चेहरे और बॉडी पर अलग-अलग लाइटिंग पड़ रही है, तो यह डीपफेक हो सकता है .









