गैंगस्टरों की अब खैर नहीं, पंजाब पुलिस AI की मदद से कसेगी शिकंजा

चंडीगढ़
पंजाब में अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए सरकार ने अब तकनीक का सहारा लिया है। पंजाब पुलिस को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से आईआईटी रोपड़ के साथ समझौता किया है। इसके तहत एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा।

इस पहल से अब अपराधियों और गैंगस्टर से जुड़ी विस्तृत जानकारी ‘वन क्लिक’ पर उपलब्ध हो सकेगी। इस समझौते के तहत स्ट्रक्चर्ड डाटा सिस्टम तैयार किया जाएगा जो राज्य में चल रहे 'गैंगस्टर ते वार और युद्ध नशे के विरुद्ध’ जैसे अभियानों को तकनीकी मजबूती देगा।

आईआईटी रोपड़ इस प्रोजेक्ट के तहत एडवांस साफ्टवेयर विकसित करेगा, जिसमें डाटा एनालिसिस, वाइस रिकग्निशन और डैशबोर्ड आधारित मानिटरिंग जैसी सुविधाएं होंगी। इससे पुलिस को रियल टाइम ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई में मदद मिलेगी।

खास बात यह है कि इससे अपराध संबंधी डाटा को एकीकृत किया जाएगा। पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद स्कैन किए गए पीडीएफ और हस्तलिखित दस्तावेजों को भी डिजिटल फार्म में बदलकर एक ही प्लेटफार्म पर लाया जाएगा। इससे पुलिस के पास अपराधियों का व्यापक डाटाबेस तैयार होगा और जांच प्रक्रिया तेज होगी।

प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक पुलिसिंग में डाटा की भूमिका बेहद अहम है, लेकिन बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड असंगठित रूप में होने के कारण विश्लेषण में दिक्कत आती है। यह प्रोजेक्ट उस कमी को दूर करेगा जिससे जांच अधिक प्रभावी बन सकेगी।

प्रोजेक्ट के तहत एआई टूल्स, प्रेडक्टिव माडल और एनालिटिकल डैशबोर्ड का उपयोग कर डाटा को एक्शन योग्य इंटेलिजेंस में बदला जाएगा। इससे पुलिस को न केवल अपराध पैटर्न समझने में मदद मिलेगी, बल्कि संभावित घटनाओं को पहले ही भांपकर कार्रवाई करना भी आसान होगा। मोहाली स्थित एआईएमएस में स्थापित डाटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल स्पोर्ट यूनिट (डीआइटीएसयू) इस पूरे प्रोजेक्ट में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का काम करेगी।

सार्वजनिक सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी
पंजाब पुलिस का मानना है कि आईआईटी रोपड़ के साथ यह साझेदारी बल में एआई और मशीन लर्निंग क्षमताओं को मजबूत करेगी। इससे पुलिस कर्मियों को अपराध की पहचान और नेटवर्क ट्रैकिंग में बढ़त मिलेगी। साथ ही तकनीक के दुरुपयोग को रोकने में भी यह पहल अहम भूमिका निभाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से अपराधों की पहचान तेज होगी, नेटवर्क की निगरानी प्रभावी बनेगी और डाटा आधारित त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।

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