रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 97 लाख की साइबर ठगी, फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ खेल

पटना

राजधानी पटना में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से साइबर अपराधियों ने 97.06 लाख की ठगी की है। अब उन्होंने इसकी शिकायत साइबर थाना में की है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी अमरेंद्र कुमार सिन्हा हैं, जो खुद बैंकिंग प्रणाली के विशेषज्ञ थे। वह अगस्त 2024 में पूर्णिया जिला में होम लोन ब्रांच में मुख्य प्रबंधक के पद से रिटायर हुए थे। वर्तमान में पटना के पुनाईचक इलाके में रहते हैं।

फेसबुक विज्ञापन से हुई शुरुआत
अमरेंद्र कुमार सिन्हा की ठगी की कहानी एक सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुई। फेसबुक पर उन्होंने वेपलोग नामक एक विज्ञापन पर क्लिक  किया था, जिसके बाद अमरेंद्र कुमार सिन्हा एक युवती के संपर्क में आए। उस युवती ने खुद का परिचय साक्षी अग्रवाल के रूप में दी थी। साक्षी ने खुद को मुंबई स्थित वीवी कंस्ट्रक्शन का सीईओ बताया। उसने अपने कार्यालय का पता खोजा सोसाइटी, वैशाली नगर, जोगेश्वरी, वेस्ट मुंबई बताया था। साक्षी ने बातचीत के दौरान अमरेन्द्र कुमार सिन्हा का भरोसा जीत लिया। फिर दोनों के बीच व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल के जरिए नियमित बातचीत होने लगी, जिससे अमरेंद्र का उस पर भरोसा  लगातार गहरा होता चला गया।

कमीशन और ऑडिट के नाम पर वसूली
साक्षी ने अमरेंद्र को पॉलीअस फाइनेंस पिक नामक एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर 45 लाख रुपए निवेश करने के लिए कहा, लेकिन अमरेंद्र कुमार सिन्हा से मात्र 43 हजार रुपये निवेश किए। ज्यादा ठगी करने के लिए विशवास जीतना जरुरी था, इसलिए अमरेन्द्र  कुमार सिन्हा का विश्वास जीतने के लिए उन्हें 1,978 रुपए की निकासी करने दी। जब उनके पोर्टफोलियो की एसेट्स वैल्यू 3.50 लाख रुपए दिखने लगी, तो जालसाजों का असली खेल शुरू हुआ। अमरेंद्र कुमार सिन्हा अब 1 लाख रुपए की निकासी करने की कोशिश की तो साक्षी ने अमरेन्द्र सिन्हा से 45 लाख रुपए एक्सचेंज एंड कमीशन के तौर पर जमा करवा लिए। फिर ऑडिट के नाम पर 5.33 लाख रुपए जमा करने को कहा तो अमरेन्द्र कुमार सिन्हा ने 5.33 लाख रुपए जमा कर दिए।

मां के नाम पर भी की ठगी
साक्षी ने अमरेंद्र कुमार सिहा को व्यक्तिगत रूप से भी ठगा। उसने अपनी माँ की बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि डॉक्टर को डॉलर में भुगतान करना है। अमरेंद्र ने उसकी मदद के लिए 1 लाख रुपये को डॉलर में कन्वर्ट करवाकर भेज दिए।

करोड़ों का निवेश और हाथ में शून्य
जैसे-जैसे निवेश की राशि बढ़ती गई, उसे निकालने की शर्तें भी कठिन होती गईं। कंपनी ने कहा कि कुल एसेट्स निकालने के लिए 95 लाख रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट देने होंगे। साक्षी ने नाटक किया कि उसने खुद इसकी व्यवस्था कर दी है, लेकिन 5 लाख रुपये कम पड़ रहे हैं। अमरेंद्र ने भरोसा करके वह 5 लाख भी दे दिए। इसके बाद स्टाफ की सैलरी के नाम पर 1.20 लाख रुपए भी लिए गए। जब अक्टूबर 2025 में उनका खाता फ्रीज कर दिया गया, तो साक्षी ने दिल्ली जाने और खाता खुलवाने के नाम पर 30 हजार रुपए और ऐंठ लिए। इस तरह धीरे-धीरे रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने अपनी जीवन भर की कमाई के 97.06 लाख रुपये गंवा दिए।

सभी जानकारी निकले फर्जी
मामला दर्ज होने पर पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि साक्षी के द्वारा दे गई साड़ी जानकारियां झूठी थी। उसने खुद के बारे में जो कुछ बताया या फिर उसने अपने कार्यालय के बारे में जो कुछ भी बताया था, सब कुछ फर्जी था। पटना के साइबर थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और अब मामले की जांच की जा रही है।

 

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