लखनऊ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा, अल-कायदा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई

लखनऊ

राजधानी लखनऊ में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर सक्रिय अल-कायदा हैंडलर उमर हेलमंडी पर राजधानी लखनऊ को आतंकी गतिविधियों का लॉन्चपैड बनाने की साजिश रचने का आरोप सामने आया है। एनआईए की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 15 अगस्त 2021 से पहले देश में बड़े आतंकी हमलों की योजना बनाई गई थी, जिसकी कमान सीमा पार से संचालित हो रही थी और जिसका संचालन लखनऊ जैसे संवेदनशील शहर से किया जाना था।

इस मामले में एनआईए-एटीएस की विशेष अदालत ने मुसीरुद्दीन उर्फ मुसीर, मिनहाज अहमद और तौहीद अहमद शाह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह राज्य के खिलाफ सुनियोजित युद्ध जैसी साजिश थी, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

सोशल मीडिया से तैयार हुआ आतंकी मॉड्यूल
जांच में सामने आया कि अल-कायदा के इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) हैंडलर उमर हेलमंडी को भारत में नेटवर्क तैयार करने, युवाओं को रेडिकलाइज करने और छोटे-छोटे आतंकी मॉड्यूल बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को चुना और उन्हें संगठन की विचारधारा से जोड़कर आतंकी शपथ दिलवाई, जिसका वीडियो भी बाद में बरामद हुआ और अदालत में इसे महत्वपूर्ण सबूत माना गया।

लखनऊ में तैयार हो रहा था लॉन्चपैड
जांच एजेंसियों के अनुसार लखनऊ को केवल एक ठिकाने के रूप में नहीं बल्कि आतंकी लॉन्चपैड के रूप में विकसित किया जा रहा था। मड़ियांव, काकोरी, मदेयगंज, वजीरगंज और ठाकुरगंज जैसे इलाकों में हथियार जुटाए गए और स्थानीय स्तर पर नेटवर्क बनाने की कोशिश की गई। डिजिटल माध्यमों से संपर्क और प्रचार भी लगातार किया जा रहा था।

सीमा पार से कश्मीर तक फैला नेटवर्क
डिजिटल ट्रेल की जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क सीमा पार से लगातार निर्देश प्राप्त कर रहा था और इसकी कड़ियां कश्मीर तक भी जुड़ी हुई थीं। योजना के तहत भीड़भाड़ वाले इलाकों, सरकारी प्रतिष्ठानों और संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की तैयारी थी, जिसमें मानव बम और विस्फोटक हमलों की साजिश शामिल थी।

अदालत का सख्त संदेश
एनआईए कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आतंकवादी हमला हो या न हो, उसकी तैयारी और साजिश ही अपने आप में पूर्ण अपराध है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपियों ने केवल विचारधारा साझा नहीं की, बल्कि सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाया और नेटवर्क तैयार करने में भूमिका निभाई।

मददगार भी साजिश में शामिल
जांच में यह भी सामने आया कि शकील, मुस्तकीम और मोहम्मद मोईद ने जानते हुए इस आतंकी नेटवर्क को सहायता दी। अदालत ने इसे केवल मदद नहीं बल्कि सक्रिय सहभागिता माना और कहा कि यह एक संगठित आतंकी साजिश का हिस्सा था, जिसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

बिजनौर में भी बड़ी कार्रवाई
इसी बीच बिजनौर पुलिस ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें समीर उर्फ रुहान और राजू राम गेदारा शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग सोशल मीडिया और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे और गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे थे।

सोशल मीडिया और टेलीग्राम से चल रहा था नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि पूरा मॉड्यूल टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए सक्रिय था। इसमें युवाओं को जोड़कर उन्हें गाड़ियों में आगजनी, रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने और अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

 

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786