चंडीगढ़.
मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत ढाल बनकर उभर रही है। यह योजना प्रति परिवार 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया करवा रही है, जिससे दिल की बीमारियों, कैंसर और अन्य गंभीर रोगों के इलाज में लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। खासतौर पर आपातकालीन स्थितियों में यह योजना समय पर इलाज सुनिश्चित कर आर्थिक बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर किया जा रहा है। अचानक होने वाली गंभीर बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं अक्सर बिना चेतावनी के सामने आती हैं। ऐसे में समय पर इलाज और आर्थिक सुरक्षा दोनों जरूरी हो जाते हैं, जिसे यह योजना पूरा कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक राज्य में 33 लाख से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ चुके हैं।
330 करोड़ रुपये हुए खर्च
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 1,98,793 मामलों में मुफ्त इलाज को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर करीब 330 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें से 59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अस्पतालों को जारी भी की जा चुकी है। योजना का लाभ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। मोहाली जिला अस्पताल की मेडिकल आफिसर डा ईशा अरोड़ा के मुताबिक, अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। समय पर जांच और इलाज से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है।
कैंसर-डायबिटीज और सांस से जुड़ी बीमारी 75 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस संबंधी रोग दुनिया भर में करीब 75 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अस्पताल नेटवर्क को मजबूत करने और दावों की प्रक्रिया को आसान बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना ने उन परिवारों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें पहले इलाज के लिए कर्ज लेना या संपत्ति बेचनी पड़ती थी। भारत में अभी भी करीब 47 प्रतिशत स्वास्थ्य खर्च लोगों को अपनी जेब से करना पड़ता है, ऐसे में यह योजना बड़ी मदद साबित हो रही है। कुल मिलाकर ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ न केवल इलाज का साधन बन रही है, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हो रही है।









