चंडीगढ़
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मुआवजा मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी दावेदार की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो केवल इसी आधार पर उसकी याचिका खारिज नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में मृतक के कानूनी वारिस दावा आगे बढ़ा सकते हैं। अदालत एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसे मूल दावेदार के कानूनी प्रतिनिधियों ने दाखिल किया था।
अपील में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के 20 मार्च 1999 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दावेदार की मृत्यु के बाद यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी गई थी कि मुकदमा जारी रखने का अधिकार समाप्त हो गया है।
मूल दावेदार एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थी और लंबे समय तक अस्पताल में इलाजरत रही। उसकी मृत्यु हो गई। ट्रिब्यूनल ने यह मानते हुए कि मृत्यु के बाद दावा जीवित नहीं रहता, याचिका को खारिज कर दिया।
परिजनों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि मौत दुर्घटना में लगी चोटों के कारण हुई और उन्हें साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए था। ट्रिब्यूनल ने केवल दावेदार की मृत्यु के आधार पर याचिका खारिज कर दी, जबकि उसे परिजनों को सबूत पेश करने का अवसर देना चाहिए था। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम एक सामाजिक कल्याण कानून है, जिसका उद्देश्य पीड़ितों को न्यायसंगत और उचित मुआवजा देना है।









