गया-सासाराम से बक्सर तक सीधी रेल कनेक्टिविटी, डीडीयू बाईपास से बनेगी 2.66 किमी नई लाइन

बक्सर.

पूर्व मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने और परिचालन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। डीडीयू बाईपास लाइन को सुदृढ़ करने के लिए डीडीयू-दानापुर रेलखंड के ईस्ट आउटर केबिन (ईओसी) से डीडीयू-गया लाइन के फ्लाईओवर केबिन (एफओसी) तक नई ब्राड गेज (बीजी) रेल लाइन निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है।

यह परियोजना बक्सर से भभुआ रोड और सासाराम के रास्ते गया तक निर्बाध रेल संपर्कता प्रदान करेगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बक्सर ताप बिजली घर को सुगम परिवहन के माध्यम से कोयले की आपूर्ति करना है। इसके जरिए गढ़वा या गया की तरफ से आने वाली मालगाड़ियां बिना डीडीयू जंक्शन के यार्ड में प्रवेश किए बाहर से ही बक्सर की तरफ निकल सकेंगी। इससे इंजन रिवर्सल की समस्या भी नहीं रहेगी। ट्रेन गंज ख्वाजा स्टेशन से सीधे कुछमन पहुंचेगी।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और लागत
रेलवे द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, इस नई रेल लाइन की कुल लंबाई 2.666 किलोमीटर होगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत 11.58 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। चयनित एजेंसी को काम शुरू होने के छह महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत व्यापक स्तर पर तकनीकी कार्य किए जाएंगे, जिनमें भारी पैमाने पर मिट्टी भराई (अर्थवर्क), पुलों के सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर का निर्माण, रेल ट्रैक बिछाना, बैलास्टिंग और वेल्डिंग, सीमेंट, स्टील की आपूर्ति और ट्रैक फिटिंग शामिल है।

बक्सर थर्मल पावर प्लांट को होगा सीधा लाभ
इस बाईपास लाइन के निर्माण का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ बक्सर (चौसा) स्थित थर्मल पावर प्लांट को मिलेगा। धनबाद की ओर से आने वाली कोयला लदी मालगाड़ियों को अब डीडीयू जंक्शन के मुख्य यार्ड में आने की आवश्यकता नहीं होगी। ये ट्रेनें बाईपास के जरिए सीधे डीडीयू-पटना रेलखंड पर चौसा के पास स्थित पावर प्लांट तक पहुंच सकेंगी, जिससे कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया तेज और निर्बाध हो जाएगी। आपको बता दें कि बक्सर ताप बिजली घर को निर्बाध कोयला आपूर्ति के लिए एक ऐसी ही व्यवस्था आरा जंक्शन के पास डीडीयू-पटना रेलखंड के जगजीवन हाल्ट और आरा-सासाराम रेलखंड के उदवंतनगर के बीच भी की जा रही है। वहां भी बाईपास लाइन के जरिए ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे सासाराम से आने वाली ट्रेन बिना आरा जंक्शन जाए और बिना इंजन रिवर्स किए बक्सर की तरफ जा सके।

परिचालन में सुधार और दबाव में कमी
वर्तमान में डीडीयू जंक्शन पर प्रतिदिन लगभग 175 यात्री ट्रेनों और 150 मालगाड़ियों का आवागमन होता है। इस नई लाइन के शुरू होने से डीडीयू जंक्शन परिसर की मुख्य लाइन पर दबाव कम होगा। इससे एक वैकल्पिक मार्ग विकसित होगा और किसी भी आपात स्थिति में ट्रेनों को बाईपास के जरिए पटना और गया रेलखंड की ओर मोड़ा जा सकेगा।

बिजली घर की तीसरी यूनिट जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद
बक्सर ताप बिजली घर 1320 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजना है। यहां 660-660 मेगावाट की दो बिजली उत्पादन यूनिट की स्थापना होनी है। इनमें से एक यूनिट बीते नवंबर महीने में औपचारिक रूप से कार्यशील हो चुकी है। इसका उद्घाटन बीते 22 अगस्त को ही गयाजी में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। परियोजना की दूसरी यूनिट का निर्माण भी लगभग पूरा हो चला है। जल्दी ही इससे भी उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। इसे कार्यशील करने के लिए निर्बाध तरीके से कोयले की आपूर्ति आवश्यक होगी। इसमें प्रतिदिन दो रैक कोयले की खपत का अनुमान है।

बक्सर-सासाराम-गया-बिहटा-आरा-बक्सर ट्रेन की बनेगी गुंजाइश
यह नई बाईपास रेल लाइन परियोजना शाहाबाद और मगध क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। फिलहाल बक्सर और आरा जिले के लोगों के लिए जहानाबाद, गया की सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। बक्सर के लिए तो सासाराम और कैमूर की भी सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। डीडीयू बाईपास और बिहटा-दनियांवा रेल लाइन के माध्यम से यह समस्या दूर हो सकती है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रसाद, शिक्षाविद निर्मल सिंह, सरोज सिंह आदि का कहना है कि बक्सर-कुछमन-चंदौली-सासाराम-गया-जहानाबाद-जट डुमरी-बिहटा-आरा-बक्सर होते हुए इस क्षेत्र में लोकल ट्रेनें चलाना संभव हो सकेगा। इससे सात से आठ जिले को लोगों को लाभ मिल सकेगा।

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