चंडीगढ़
नगर निगम और क्रेस्ट से जुड़े करीब 200 करोड़ के घोटाले में एक नया मोड़ सामने आया है। इन मामलों में गिरफ्तार हुए आइडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने पुलिस रिमांड के दौरान बताया कि ऑडिटरों को खुश करने के लिए उनके घरों में सोलर पैनल लगवाए गए थे।
ऋषि ने बताया कि हर तीन महीने में बैंक की ऑडिट की जाती थी। उनकी ब्रांच में नरेश सुखीजा और दीपक कुमार ऑडिट करने आए थे। उन्होंने ऑडिट को मैनेज करने के लिए अपने सेविंग खाते से उनके घरों पर सोलर पैनल लगवाए थे। यह रकम उन्होंने क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल के खाते में ट्रांसफर की थी।
पुलिस ने रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान को जिला अदालत में पेश किया। पुलिस ने सात दिन के रिमांड की मांग की, लेकिन अदालत ने चार दिन का रिमांड मंजूर किया। अब पुलिस इन आरोपियों को सुखविंदर अबरोल के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, जिससे घोटाले के पूरे नेटवर्क और अन्य शामिल अधिकारियों की भूमिका का खुलासा हो सके।
ऑडिट मैनेज करने के लिए लगवाए गए सोलर पैनल
रिभव ऋषि ने पुलिस पूछताछ में बताया कि हर तीन महीने में बैंक की ऑडिट होती थी। उनकी ब्रांच में ऑडिटर के रूप में नरेश सुखीजा और दीपक कुमार आते थे। ऑडिट में गड़बड़ियों को छिपाने के लिए उन्हें खुश रखने के उद्देश्य से उनके घरों पर सोलर पैनल लगवाए गए। इसके लिए ऋषि ने अपने सेविंग अकाउंट से रकम ट्रांसफर कर क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल के खाते में डाली थी। पुलिस ने हाल ही में सुखविंदर अबरोल को भी गिरफ्तार किया है, जिसे पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है।
4.98 करोड़ की अवैध पेमेंट का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि 1 सितंबर 2025 को सनलिव सोलर कंपनी के खाते में 4.98 करोड़ रुपये की अवैध पेमेंट की गई थी। यह भुगतान नगर निगम के खाते से किया गया, जिसे आरोपित सीमा धीमान ने अप्रूव किया था।
इस ट्रांजेक्शन को बैंकिंग स्तर पर रिलेशनशिप मैनेजर शमीम घर और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के रीजनल हेड धीरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा मंजूरी दी गई थी।
हाल ही में पुलिस ने अबरोल को भी गिरफ्तार किया है जोकि पांच दिनों के रिमांड पर है। ऋषि ने रिमांड के दौरान बताया कि एक सितंबर 2025 को एक कंपनी सनलिव सोलर के खाते में 4.98 करोड़ रुपये की अवैध पेमेंट की गई थी। यह पेमेंट नगर निगम के खाते से हुई थी जिसे आरोपित सीमा धीमान ने अप्रूव किया था।
इसके लिए नगर निगम के गवर्नमेंट बिजनेस बैंकिंग रिलेशनशिप मैनेजर शमीम धर और आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के रिजनल हेड धीरेंद्र प्रताप सिंह की ओर से अप्रूवल दी गई थी। ऐसे में अब पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है और अन्य अफसरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
वहीं, सोमवार को पुलिस ने रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान को जिला अदालत में पेश किया। पुलिस ने अदालत से इनका सात दिनों का और रिमांड मांगा, हालांकि जज ने चार दिनों का रिमांड मंजूर किया। पुलिस अब इन्हें सुखविंदर अबरोल के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी।
निगम का अकाउंटेंट फरार, फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप
इस पूरे घोटाले में नगर निगम के अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा की भी बड़ी भूमिका सामने आ रही है। यह मामला सामने आने के बाद से वह फरार है। मिश्रा ने सोमवार को गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी भी दायर की है। वहीं, अन्य आरोपितों ने भी इस घोटाले के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने में मिश्रा का ही नाम लिया है।
रिभव ऋषि ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के बैंक खातों का लेन-देन अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा करता था। फर्जी दस्तावेज अनुभव मिश्रा और बैंककर्मी अभय कुमार ने तैयार किए थे। वहीं, पुलिस जांच में सामने आया है कि लगभग 116.84 करोड़ रुपये की एफडीआर का रिकाॅर्ड बैंक सिस्टम में मौजूद नहीं था।
पुलिस को 8.22 करोड़ रुपये से अधिक की तीन संदिग्ध एंट्रियां भी मिली हैं जोकि नगर निगम के रिकाॅर्ड से मेल नहीं खाती। ऐसे में पुलिस फर्जी एफडीआर तैयार करने में इस्तेमाल किए गए सिस्टम को बरामद करने की कोशिश कर रही है। इसी कारण पुलिस ने आरोपितों का रिमांड हासिल किया।








