भोपाल.
राजधानी के जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त करने और सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए अमृत-2.0 योजना के तहत बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत शहर के 10 प्रमुख नालों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए जाएंगे। इस योजना पर कुल 213.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे शहर की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रोजाना 360 एमएलडी सीवेज, बड़ा हिस्सा बिना उपचार
वर्तमान में भोपाल से प्रतिदिन करीब 360 एमएलडी सीवेज निकलता है। इसमें से लगभग 240 एमएलडी बिना उपचार के सीधे बड़े तालाब, छोटा तालाब, बेतवा नदी और अन्य जल स्रोतों में मिल रहा है। इससे जल स्रोतों का प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, जो पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।
171 एमएलडी क्षमता का होगा इजाफा
नए एसटीपी प्रोजेक्ट से शहर की उपचार क्षमता में 171 एमएलडी का इजाफा होगा। इसके बाद कुल उपचारित सीवेज 119 एमएलडी से बढ़कर 290 एमएलडी तक पहुंच जाएगा। साथ ही शहर की कुल स्थापित क्षमता 204 एमएलडी से बढ़कर 375 एमएलडी हो जाएगी।
भानपुर में बनेगा सबसे बड़ा प्लांट
इस परियोजना में सबसे बड़ा एसटीपी भानपुर क्षेत्र में लगाया जाएगा, जिसकी क्षमता 60 एमएलडी होगी। पातरा नाला पर बनने वाले इस प्लांट का उपचारित पानी हलाली डैम में छोड़ा जाएगा। इसके अलावा बावड़िया कलां में 32 एमएलडी और खजूरी कलां में 20 एमएलडी क्षमता के प्लांट प्रस्तावित हैं।
10 स्थानों पर लगेंगे नए एसटीपी
चार इमली, समरधा, माता मंदिर, बाणगंगा, अरहेड़ी, एकांत पार्क, कोटरा, खजूरी कलां, बावड़िया कलां और भानपुर सहित कुल 10 स्थानों पर नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। इनकी कुल क्षमता 171 एमएलडी होगी।
वर्तमान एसटीपी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे
नगर निगम वर्तमान में 17 एसटीपी संचालित कर रहा है, जिनकी कुल क्षमता 204 एमएलडी है। हालांकि, इनमें से केवल 119.63 एमएलडी सीवेज ही उपचारित हो पा रहा है। यह अंतर सिस्टम की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े करता है, जिसे सुधारने की जरूरत है।
जल स्रोतों को मिलेगा बड़ा लाभ
नए प्लांट शुरू होने के बाद शहर के नालों से आने वाला दूषित पानी पहले साफ किया जाएगा, फिर जल स्रोतों में छोड़ा जाएगा। इससे बड़े तालाब, छोटे तालाब और बेतवा नदी के प्रदूषण में कमी आएगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
17 एसटीपी संचालित –
अमृत-टू प्रोजेक्ट के तहत शहर में 10 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनसे 171 एमएलडी पानी उपचारित करने के बाद ही विभिन्न जलस्त्रोतों में छोड़ा जाएगा। वर्तमान समय में शहर में 17 एसटीपी संचालित किए जा रहे हैं।
– संस्कृति जैन, निगमायुक्त









