चंडीगढ़.
प्राचीन हस्तलिखित धरोहर यानी पांडुलिपि। इनके माध्यम से हमें अपनी संस्कृति के बारे में पता चलता है और इतिहास से जुड़ी तमाम जानकारी मिलती है। एक तरह से यह हमारी सभ्यता का अहम हिस्सा है। जो लोग इनके महत्व समझते हैं वे न केवल इसे संजो कर रखा है बल्कि दूसरों को भी इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं।
इसी कड़ी में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से ज्ञान भारतम् मिशन शुरू किया गया है। ताकि इसके महत्व के बारे में बताया जाए। आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में जानकारी दी जाए, विरासत को संभाल कर रखा जाए। साथ ही डिजिटाइज भी किया जाए। इसके तहत अलग-अलग चरण में काम होंगे। इस मिशन को चंडीगढ़ के सेक्टर-10 गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी की ओर से काम शुरू हो गया है। इसमें म्यूजियम की ओर से आम लोगों से लेकर संस्थानों, पुस्तकालयों से जोड़ा जाएगा। इस दौरान कई गतिविधियां भी होंगी। आइए जानते हैं किस तरह से विरासत, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण की इस मिशन को लेकर काम किया जाएगा और लोग किस तरह से सहयोग कर सकते हैं।
बात विरासत की है तो महत्वपूर्ण है
म्यूजियम की डिप्टी क्यूरेटर सीमा गेरा ने बताया गया कि इस मिशन के तहत देशभर में काम हो रहा है। शहर में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है। यह मिशन सभी के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि बात विरासत की है। इसको बचाने और आने वाली पीढ़ियों को पहुंचाने की है। इसलिए जरूरी है कि सभी इस मिशन में अपने स्तर पर योगदान दें।
तीन महीने तक पहले चरण के तहत सर्वे
म्यूजियम की क्यूरेटोरियल असिस्टेंट मेघा कुलकर्णी ने बताया कि इस मिशन के लिए चंडीगढ़ के लिए नोडल एजेंसी गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी है। हमारी ओर से काम करना शुरू कर दिया गया है। सबसे पहले इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जल्द ही वालंटियर्स को भी जोड़ा जाएगा। ताकि वह भी पहले चरण के तहत सर्वे करने में मदद करें। संस्थानों को भी सहयोग करने के लिए कहा गया है। हाल में कुछ मंदिरों में होकर आएं। इंस्टीट्यूट, म्यूजियम, लाइब्रेरी के अलावा आम लोगों के पास अगर मैनुस्क्रिप्ट है वह हम तक पहुंच सकते हैं या फिर किसी तरह की कोई परेशानी है तो हमारी टीम उन तक पहुंच जाएगी और सर्वे करने में मदद करेगी। सर्वे के लिए एक सरकार की ओर से एप तैयार की गई है। इसमें अपनी सुविधा के हिसाब से किसी भी भाषा का चयन करके जानकारी दे सकते हैं।
यह मिशन इसलिए भी जरूरी है –
- मैनुस्क्रिप्ट हमारी धरोहर है, जो हमारे कल्चर का प्रतिनिधित्व करती है।
- कई इंस्टीट्यूट, म्यूजियम, लाइब्रेरी और लोगों के पास मैनुस्क्रिप्ट है।
- ऐसे में जरूरत है कि इन सभी को संभाल कर रखा जाए, कंजर्व किया जाए।
- ऐसा होगा तभी आने वाली पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं।
इस तरह से होगा काम
सर्वे: पहला चरण सर्वे है। इसमें एप के माध्यम से जानकारी देनी है। इसमे अपनी जानकारी देनी है और यह भी बताना है कितने और किस तरह के मैनुस्क्रिप्ट है।
कर्जवैशन: पहला चरण जब खत्म हो जाएगा तो देखा जाएगा कि अगर मैनुस्क्रिप्ट खराब है या नहीं। अगर हालत खराब होगी तो उसको कर्जव किया जाएगा।
डिजिटाइजेशन : जितने भी मैनुस्क्रिप्ट होंगे उन्हें डिजिटाइज किया जाएगा। साथ ही डाक्यूमेंटेशन भी होगा। इस में मैनुस्क्रिप्ट की टाइटल से लेकर यह जानकारी होगी कि किस विषय पर है, कब का है, हैंड रिटन है, पेट किया हुआ है या साथ में इलस्ट्रेशन है।
ट्रांसलेशन इसके बाद मैनुस्क्रिप्ट को ट्रांसलेट भी किया जाएगा। ताकि युवा पीढी को पता चले कि किस मेक्या लिखा गया है।
स्सिर्च-आउटरिच: यह सब होंने याद कई सेमिनार, वर्कशाप आयोजित किए जाएंगे। इस में बताया जाएगा कि क्या-क्या रिकार्ड मे है। जो रिसर्च करना चाहता है उनके लिए भी यह अहम हिस्सा है।









