राज्यसभा टिकट पर छिड़ा विवाद: आनंद शर्मा बोले– पॉलिटिक्स में सच बोलना ही बन गया गुनाह

हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश में इस बार राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद आसान और सुखद नजर आ रहा है। भाजपा की ओर से कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। इस बार राज्यसभा कैंडिडेट के तौर पर मौका नहीं दिए जाने पर कांग्रेस लीडर आनंद शर्मा की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि पॉलिटिक्स में सेल्फ रिस्पेक्ट बहुत महंगी पड़ती है। सच बोलना अक्सर गुनाह माना जाता है। मैं इस मामले को हाईकमान के पास नहीं ले जाऊंगा।

सुप्रीम कमांड ही देगा जवाब
यह पूछे जाने पर कि ऐसा लग रहा है कि टिकट नहीं मिलने से निराश हैं। इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता… मुझे कोई जानकारी नहीं है। आगे एएनआई संवाददाता के यह पूछे जाने पर कि सेंट्रल लीडरशिप ऐसे फैसले ले रही हैं क्योंकि कांग्रेस बैकफुट पर जा रही है? इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि इसका जवाब तो सुप्रीम कमांड जिन्होंने फैसला लिया है वही दे सकते हैं और जिनके कहने पर फैसला होता है वह बता सकते हैं।

राजनीति में आत्मसम्मन बहुत महंगा, सच बोलना अपराध
आनंद शर्मा ने कहा कि मैं इस पर कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। इस बात पर कि हिमाचल प्रदेश में आनंद शर्मा का राजनीतिक सफर 50 साल का रहा है। ऐसे में इस घटनाक्रम को आप किस तरह देखते हैं। इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि देखिए निराशा तो नहीं कहूंगा लेकिन एकबार जरूर कहना चाहूंगा कि राजनीति में आत्मसम्मान बहुत महंगी चीज होता है। इसकी कीमत चुकानी पड़ती है और सच बोलना एक अपराध और अभिशाप समझा जाता है। इसके आगे मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।

हिमाचल प्रदेश को रिप्रेजेंट करना मेरे लिए गर्व की बात
आनंद शर्मा ने आगे कहा कि दशकों से हिमाचल प्रदेश और देश को रिप्रेजेंट करना मेरे लिए गर्व की बात रही है। मैं हमेशा हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ रहूंगा। आनंद शर्मा को सच बोलने से कभी नहीं रोका जा सकता है। मैं यह मामला हाईकमान के पास नहीं ले जाऊंगा। मैं इस मुद्दे पर उनके साथ कोई बात नहीं करूंगा।

पिछली बार कांग्रेस को लगा था झटका
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट भाजपा की राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का छह साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई है। करीब दो साल पहले हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। उस समय कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए थे और भाजपा के हर्ष महाजन राज्यसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में कांग्रेस नेताओं की ओर से क्रॉस वोटिंग सामने आई थी। हालांकि इस बार स्थिति अलग है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान है। भाजपा ने इस बार अपना कंडिडेट नहीं उतारा है।

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