SU-30, राफेल और ब्रह्मोस के तांडव ने किराना हिल्स धंसा दिया, एक्सपर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर का सीक्रेट लीक किया

नई दिल्ली

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह रणनीतिक रूप से झटका दिया, इस पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब जाने-माने एरियल वॉरफेयर विश्लेषक और इतिहासकार टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स पर सटीक हमला कर उसकी कमर तोड़ दी थी. टॉम कूपर के मुताबिक यही वह निर्णायक वार था, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था और सीजफायर की भीख मांगने लगा. हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स को निशाना बनाने से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि सबूत साफ हैं.

टॉम कूपर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और टकराते दिखाई देते हैं. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से धुआं उठता दिखा. कूपर के मुताबिक भारत ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को निष्क्रिय किया और फिर अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया.

पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी मारे गए?

  •     टॉम कूपर ने दावा किया कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ फेल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया.
  •     कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12-13 एयरबेस पर हमला किया. अंत में किराना हिल्स पर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेर लिया.
  •     हमले के समय कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज थी. पाकिस्तान, अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाश रहा था. कूपर के शब्दों में यह साफ संकेत था कि पाकिस्तान अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था.

क्यों पाकिस्तान की कमजोर नस है किराना हिल्स?

किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. यहां 20 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हार्डन शेल्टर व भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं. टॉम कूपर का तर्क है कि ऐसी जगह पर हमला तभी किया जाता है जब स्पष्ट संदेश देना हो- ‘हम जब चाहें, जहां चाहें, जितनी ताकत से चाहें, वार कर सकते हैं.’ कूपर ने यह भी सवाल उठाया कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर हमले से इनकार क्यों करता है. वो इसे लेकर इतने आश्वस्त हैं कि बोलते हैं कि इससे इनकार करना वैसा ही जैसे कोई कहे कि सूरज पूरब से नहीं उगता.

रूसी फाइटर जेट और ब्रह्मोस ने किया तांडव

हथियारों की बात करें तो कूपर के अनुसार भारत को किसी विशेष गुप्त तकनीक की जरूरत नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जगुआर ने रैम्पेज लॉन्च किए और राफेल ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इतना पाकिस्तान के लिए काफी था. उन्होंने भारत की इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की खास तारीफ की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई. कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. किराना हिल्स पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और एडवांस तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है.

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