महिलाओं को मिली रोजगार की चाबी, दस हजार की मदद से सिलाई मशीन और गाय ने बदली किस्मत

छपरा.

सारण में इन दिनों गांव-गांव एक नई तस्वीर उभर रही है। जिस घर में कल तक मजदूरी की अनिश्चित कमाई थी, आज वहां छोटा कारोबार चल रहा है। जिन महिलाओं को लंबे समय तक घर तक सीमित माना गया, वही महिलाएं अब कमाई की कमान संभाल रही हैं।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत खाते में आए 10 हजार रुपये सारण की हजारों महिलाओं के लिए केवल रकम नहीं बने यह उनके लिए आत्मनिर्भरता का पहला कदम बन गया। दिघवारा प्रखंड की नीतू देवी,जानकी देवी और लालती देवी जैसी महिलाएं अब पूरे जिले में चर्चा का विषय हैं। इनकी कहानी बताती है कि अगर अवसर मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी परिवार की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं।

आंकड़ों ने भी कहा- बदल रहा है समय
सारण में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का असर अब कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की गलियों और बाजारों तक पहुंच चुका है। नवंबर 2025 तक 4,93,621 महिलाएं योजना से जुड़ीं थी, जिनमें से 17,608 महिलाओं के खाते में राशि भेजी गई।अब तक कुल 5,11,229 महिलाएं योजना के दायरे में आ चुकी हैं। यानी सारण अब इस योजना में अग्रणी जिलों में गिना जाने लगा है।

रामपुर आमी की नीतू देवी टोटो बना परिवार की कमाई का सहारा
दिघवारा प्रखंड के रामपुर आमी पंचायत में रहने वाली नीतू देवी कौसर जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं।नीतू देवी के घर की हालत पहले वैसी थी, जैसी गांव के कई मजदूर परिवारों की होती है कमाई का कोई भरोसा नहीं। उनके पति मजदूरी करते थे, लेकिन काम मिला तो ठीक, नहीं मिला तो घर में चिंता। इसी बीच मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से नीतू देवी को 10 हजार रुपये की सहायता मिली। नीतू देवी ने इसे खर्च नहीं किया, बल्कि इसे पूंजी बनाया। उन्होंने कुछ अतिरिक्त राशि जोड़कर किस्त पर बैटरी चालित टोटो खरीद ली। टोटो चलाने की जिम्मेदारी उनके पति ने संभाली और कुछ ही समय में उनकी रोज की कमाई 700 से 1000 रुपये तक पहुंच गई।

घर बैठे काम जानकी देवी ने सिलाई से बना ली पहचान
दिघवारा की जानकी देवी जय गणेश स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। उनके पास छह महीने का छोटा बच्चा था। ऐसे में घर से बाहर जाकर काम करना संभव नहीं था। पति दिल्ली में मजदूरी करते थे, लेकिन पिछले छह महीनों से पत्नी-बच्चे की देखभाल के लिए गांव में ही रुक गए थे। इससे कमाई घट गई और घर पर आर्थिक दबाव बढ़ गया। इसी कठिन समय में योजना से मिले 10 हजार रुपये उनके लिए उम्मीद की तरह आए। जानकी देवी ने पहले से सिलाई का प्रशिक्षण ले रखा था। उन्होंने दिघवारा प्रखंड स्थित संस्कार जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र से यह हुनर सीखा था। अब जानकी देवी घर में रहकर बच्चे की देखभाल भी कर रही हैं और साथ ही अपनी आमदनी भी बना रही हैं। गांव की महिलाओं के कपड़े सिलने से उन्हें धीरे-धीरे पहचान और काम दोनों मिल रहे हैं।

मजदूरी से दूध का कारोबार, लालती देवी की मेहनत रंग लाई

  • दिघवारा प्रखंड की लालती देवी जय गणेश जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। पहले वे खेती से जुड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं।गांव में काम मिला तो दिन चलता, नहीं मिला तो घर में तंगी।मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिले 10 हजार रुपये से लालती देवी ने एक गाय खरीदी।
  • यह गाय प्रतिदिन करीब 10 लीटर दूध देती है। लालती देवी अब चाहती हैं कि अगर आगे और मदद मिले, तो वे 10–12 गायें खरीदकर अपना पशुपालन बढ़ाएं। सारण में इस योजना का सबसे बड़ा असर यह दिख रहा है कि महिलाएं अब केवल सहयोगी नहीं, बल्कि कमाने वाली मुख्य ताकत बन रही हैं।
  • कहीं टोटो की चाबी महिलाओं के हाथ में है, कहीं सिलाई मशीन की रफ्तार से घर चल रहा है, तो कहीं दूध के डिब्बे के साथ आर्थिक आजादी की नई सुबह आ रही है।

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