श्रम विभाग के 1500 करोड़ के वर्क स्लिक घोटाले की जांच तेज, आज होगी कमेटी की पहली बैठक

चंडीगढ़.

हरियाणा में हाल ही में चर्चा में आए श्रम विभाग के 1500 करोड़ रुपये के वर्क स्लिक घोटाले की जांच अब तेज होगी। जांच के लिए गठित कमेटी की पहली बैठक शुक्रवार को चंडीगढ़ में होने जा रही है। हालांकि यह बैठक तय समयावधि के बाद हो रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कमेटी का गठन करते समय एक माह के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा था।

श्रम मंत्री अनिल विज ने दिसंबर में इस घोटाले को उजागर किया था। शुरू में हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच की गई, जहां बहुत सारी गड़बडिय़ां मिलीं। विभागीय जांच लगभग चार महीने पहले शुरू हुई थी और अब तक 13 जिलों में 100 प्रतिशत जांच पूरी हो चुकी है। 13 जिलों में कुल 5 लाख 99 हजार 758 वर्क स्लिप जारी की गई थीं, जिनमें से सिर्फ 53 हजार 249 ही सही पाई गईं। बाकी 5 लाख 46 हजार 509 वर्क स्लिप गलत निकलीं।

गलत वर्क स्लिप और फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज
इसी तरह, कुल 2 लाख 21 हजार 517 मजदूरों के नाम दर्ज थे, लेकिन जांच के बाद सिर्फ 14 हजार 240 ही सही पाए गए, जबकि 1 लाख 93 हजार 756 मजदूरों के नाम फर्जी निकले। इसका मतलब है कि बहुत बड़ी संख्या में गलत वर्क स्लिप और फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज किए गए थे। आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने आइएएस पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया था, जिसमें आइएएस राजीव रतन और आइपीएस पंकज नैन सदस्य हैं। एक माह बाद भी कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है।

जांच कमेटी गठित
इसका बड़ा कारण कमेटी में शामिल अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी होना है। विभागों की लगातार हो रही मीटिंगों के कारण अधिकारी इस जांच को लेकर समय नहीं दे पाए। सरकार ने कमेटी का गठन तो कर दिया है लेकिन जांच का स्वरूप तय नहीं किया। आइएएस पंकज अग्रवाल के अनुसार बजट सत्र की तैयारियों के कारण सभी अधिकारी व्यस्त हैं। इसके बावजूद छह फरवरी शुक्रवार को कमेटी की पहली औपचारिक मीटिंग बुलाई गई है। इस मीटिंग की सूचना कमेटी में शामिल सभी सदस्यों को दे दी गई है।

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