पुस्तैनी जमीन की वंशावली से बनेगी ID, बिहार के किसानों को बड़ी राहत

भागलपुर.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत ई-केवाईसी व फार्मर आईडी बनाने में कृषि व राजस्व विभाग की टीम हांफ रही है। नियमों में ढील मिलने की वजह से मंगलवार को जहां 25337 किसानों के फार्मर आईडी बनाए गए। वहीं, बुधवार को नियमों में फिर से सख्ती होने पर 4405 किसानों के ही फार्मर आईडी बनाए जा सके।

फार्मर आईडी बनाने के मामले में भागलपुर नंबर वन पर था, यह पांचवें स्थान पर पहुंच गया। पीरपैंती में ई-केवाईसी व फार्मर रजिस्ट्री की स्थिति अच्छी नहीं है। खराब परफॉरमेंस के कारण खवासपुर पीरपैंती के किसान सलाहकार रामाशीष यादव, कोदवार कहलगांव के किसान सलाहकार सच्चिदानंद मंडल, महेशी अजगैवीनाथ के किसान सलाहकार रजनीकांत मिश्र व धर्मेंद्र कुमार को मुख्यालय बुला लिया गया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर 24 घंटे में उसका स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। जिले में अबतक दो लाख 74 हजार 158 के विरुद्ध एक लाख तीन हजार 745 किसानों के फार्मर आईडी बन चुके हैं।

कहलगांव के प्रखंड विकास पदाधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि खतियान यदि पिता, दादा या पूर्वजों के नाम है तो संबंधित किसानों का फार्मर रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। संयुक्त जमाबंदी में भी अलग अलग परिवार के सदस्यों का रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। पहले जिन किसानों के नाम खतियान में थे सिर्फ उन्हीं के रजिस्ट्रेशन किए जा रहे थे।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को किसानों के एफआर बनने के कार्य में काफी तेजी आ गई थी। इसकी मूल वजह मूल जमाबंदी में आवेदक का नाम नहीं रहने के बाद भी वंशावली के आधार पर लाभ ले रहे नामों को साफ्टवेयर स्वीकार करने लगा था। सूत्र के अनुसार, जमाबंदी दादा और पिता के नाम से होने के बाद भी आवेदक का एफआर बनने लगा था। इसका निर्देश मुख्यालय से प्राप्त हुआ था।

हालांकि, उसमें कुछ गलत एफआर बनने की सूचना मिलते ही बुधवार को इसे बंद कर दिया गया है। इससे फार्मर रजिस्ट्री का कार्य बुघवार को कम हुआ। सबौर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार पाल ने बताया कि कल नाम में विसंगतियां होने के बाद भी किसानों का एफआर बन रहा था। बुधवार को पुन: पहले जैसी स्थिति हो गई है। नाम और जमाबंदी के नाम में अंतर होने पर सॉफ्टवेयर एक्सेप्ट नहीं कर रहा है।

उन्होंने बताया कि सबौर का एफआर 50 प्रतिशत होना चाहिए था, जो हो गया है। सबौर प्रखंड में टोटल 7271 पीएम किसान लाभार्थी हैं। उनमें से अबतक 6547 किसानों के केवाईसी हो चुके हैं। जबकि 3956 किसानों के एफआर कर लिए गए हैं।
इधर, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी व उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ई-केवाईसी व फार्मर रजिस्ट्री की लगातार मानीटरिंग कर रहे हैं। समीक्षा भवन में कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार इस कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। बुधवार को छुट्टी के दिन भी जिलाधिकारी सहित सभी वरीय पदाधिकारी समीक्षा भवन में मौजूद रहे। इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786