मां बनना बेहद खूबसूरत एहसास है, लेकिन इसके बाद कई फिजिकल और मेंटल बदलावों से गुजरना पड़ता है, जो आसान नहीं होते। डिलीवरी के बाद कई महिलाएं तेज सिरदर्द से भी परेशान रहती हैं, जिसे पोस्टपार्टम माइग्रेन कहा जाता है।
कई महिलाएं इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। इस बारे में डॉ. मानसी कुमार (सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्ट्रेटिक्स एंड गायनेकोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानते हैं कि यह समस्या है क्या और इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है।
क्या है पोस्टपार्टम माइग्रेन और इसके लक्षण?
प्रसव के बाद होने वाला माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से कहीं ज्यादा गंभीर होता है। यह बार-बार होने वाला एक तेज दर्द है, जिसके साथ महिला को कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-
जी मिचलाना
रोशनी या शोर के परेशानी होना
देखने में दिक्कत या धुंधलापन
हैरानी की बात यह है कि यह माइग्रेन उन महिलाओं को भी हो सकता है जिन्हें प्रेग्नेंसी से पहले कभी माइग्रेन की शिकायत नहीं रही हो।
आखिर क्यों होता है यह दर्द?
इसका मुख्य कारण प्रसव के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में अचानक आने वाली गिरावट है। इसके अलावा कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं-
नींद की भारी कमी और शारीरिक थकान
तनाव और बच्चे की देखभाल का दबाव
शरीर में पानी की कमी और एनीमिया (खून की कमी)
ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े शारीरिक बदलाव
इसे मैनेज करने के तरीके
आराम को प्राथमिकता- जब भी मौका मिले, भरपूर नींद लें और आराम करें।
खान-पान का ध्यान- शरीर में पानी की कमी न होने दें और आयरन व पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाएं।
ट्रिगर्स की पहचान- समय पर खाना न खाना या बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम माइग्रेन को बढ़ा सकता है, इनसे बचें।
स्ट्रेस मैनेजमेंट- हल्की वॉक और रिलैक्सेशन तकनीकें रिकवरी में मदद करती हैं।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. मानसी कुमार चेतावनी देती हैं कि अगर सिरदर्द लगातार बना रहता है या गंभीर है, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है, खासकर ब्रेस्टफीड करवाने वाली महिलाओं के लिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें, क्योंकि कुछ पेनकिलर ब्रेस्टफीडिंग के दौरान असुरक्षित हो सकते हैं।
तुरंत डॉक्टर के पास जाएं अगर सिरदर्द अचानक और बहुत तेज हो, सिरदर्द के साथ धुंधला दिखे या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, बुखार,कन्फ्यूजन या बहुत ज्यादा बेचैनी महसूस हो।









