नकली स्वास्थ्य मंत्री गिरफ्तार, बेटे को नौकरी से निकालने पर CMO को दी थी धमकी

अमृतसर.

अमृतसर पुलिस ने एक पांचवीं पास व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो खुद को स्वास्थ्य मंत्री बताकर सिविल अस्पताल के सीएमओ डॉ. रजनीश को धमका रहा था। आरोपी हरजीत सिंह ने अस्पताल में कथित कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए अवैध निर्देश देने का प्रयास किया। हालांकि, सीएमओ की शिकायत पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

आरोपी के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी के छह मामले दर्ज हैं। यह मामला सिविल अस्पताल अमृतसर में तैनात एक सीएमओ डॉ. रजनीश द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। डॉ. रजनीश ने बताया कि मंगलवार फरवरी को सुबह 10.34 बजे उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने सिविल अस्पताल में कथित कुप्रबंधन के आरोप लगाए और डराने-धमकाने का प्रयास किया। आरोपी ने सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करते हुए कई अवैध निर्देश जारी करने की कोशिश की।

इसके अलावा अस्पताल स्टाफ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने की बात करने लगा। आरोपी ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन ने एक कर्मचारी को बिना वजह नौकरी से निकाला, जो अनुचित है। जब सीएमओ ने आरोपी की पहचान को लेकर दोबारा सवाल किए तो उसने अपना बयान बदलते हुए खुद को मंत्री कार्यालय से गुरजीत सिंह बताया। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने बार-बार झूठा अधिकार जताकर मानसिक रूप से परेशान किया और दबाव बनाने की कोशिश की। इसके बाद सीएमओ ने मामला सिविल सर्जन अमृतसर के संज्ञान में लाया। सिविल सर्जन ने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह से संपर्क किया, जिन्होंने स्पष्ट रूप से किसी भी तरह की कॉल या निर्देश से इनकार किया और मामले में कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी द्वारा सरकारी अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए फर्जी पहचान, आपराधिक धमकी और अधिकारों के दुरुपयोग का प्रयास किया गया। इसके आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी का नाम हरजीत सिंह है। वह 57 वर्षीय है और वह गुरबख्श नगर का रहने वाला है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक प्राइवेट गोताखोर है। उसे गेट हकीमां क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

बाद में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी हरजीत सिंह का बेटा सिविल अस्पताल में सुरक्षा कंपनी में कार्यरत था, पर जब दस्तावेजों की जांच की गई तो वह पूर्व सैनिक नहीं पाया गया। ऐसे में कंपनी ने उसे नियमों के अनुसार नौकरी से हटा दिया था। डीसीपी विजय आलम ने बताया कि आरोपित के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी के छह मामले दर्ज हैं। मामले की आगे की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786