ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस में भारतीय मूल के शख्स को सौंपी अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और वहां शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय का गठन किया है। इसे उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम दिया गया है। इस बोर्ड के 'फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड' में उन्होंने भारतीय मूल के एक शख्स को बड़ी जिम्मेदारी दी है। उस शख्स का नाम अजय बंगा है। अजय बंगा वर्तमान में वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट (अध्यक्ष) हैं। यह नियुक्ति कुछ दिन पहले ही हो गई थी। वाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप खुद इस 'बोर्ड ऑफ पीस' के चेयरमैन हैं। यह कदम ट्रंप के 20-सूत्रीय गाजा पीस प्लान के फेज-2 का हिस्सा है।
 
'बोर्ड ऑफ पीस' क्या है और इसका काम क्या होगा?
यह बोर्ड ट्रंप के उस 20-सूत्रीय शांति योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त कर वहां विकास के नए रास्ते खोलना है। इसका मकसद गाजा में इंफ्रास्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण करना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारना है।

अजय बंगा की भूमिका की बात करें तो वह एक वित्तीय विशेषज्ञ हैं। वर्ल्ड बैंक के प्रमुख के तौर पर बंगा की भूमिका बेहद अहम होगी। उन्हें गाजा के लिए निवेश आकर्षित करने, बड़ी फंडिंग जुटाने और आर्थिक रणनीतियां बनाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। उनके अलावा इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

यह नियुक्ति क्यों मायने रखती है?
अजय बंगा को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वर्ल्ड बैंक के लिए नॉमिनेट किया था, लेकिन अब रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उन पर भरोसा जता रहे हैं। यह बंगा की वैश्विक स्वीकार्यता और उनकी आर्थिक कूटनीति की क्षमता को दर्शाता है। गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उन्हें शामिल करना यह बताता है कि अमेरिका वहां के पुनर्निर्माण को एक बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट के तौर पर देख रहा है।

कौन हैं अजय बंगा?
अजय बंगा कॉर्पोरेट जगत और वैश्विक अर्थव्यस्था का एक जाना-माना नाम हैं। मास्टरकार्ड को नई ऊंचाइयों पर ले जाने से लेकर वर्ल्ड बैंक की कमान संभालने तक, उनका सफर प्रेरणादायक रहा है।

उनका पूरा नाम अजयपाल सिंह बंगा है। वे 1959 में महाराष्ट्र के पुणे (खड़की छावनी) में एक सिख परिवार में पैदा हुआ। उनके पिता, हरभजन सिंह बंगा, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। इस कारण उनकी स्कूली शिक्षा भारत के अलग-अलग शहरों (सिकंदराबाद, शिमला, दिल्ली) में हुई। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट (MBA) की डिग्री हासिल की।

करियर का सफर
बंगा ने 1981 में नेस्ले इंडिया के साथ अपना करियर शुरू किया और वहां 13 साल तक काम किया। इसके बाद वे पेप्सिको से जुड़े, जहां उन्होंने भारत में 'पिज्जा हट' और 'केएफसी' जैसे ब्रांड्स को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। 1996 में वे सिटीग्रुप से जुड़े और धीरे-धीरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के CEO बने। 2010 में वे मास्टरकार्ड के CEO बने। उनके नेतृत्व में कंपनी ने न सिर्फ भारी मुनाफा कमाया, बल्कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में क्रांति ला दी।

वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष
मई 2023 में वे वर्ल्ड बैंक के 14वें अध्यक्ष चुने गए। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। वर्ल्ड बैंक में उनका फोकस जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन और विकासशील देशों को आर्थिक मदद देने पर रहा है। भारत सरकार ने उन्हें 2016 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया था। बराक ओबामा के कार्यकाल में वे साइबर सुरक्षा पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।

कुल मिलाकर ट्रंप ने अजय बंगा को विशेष रूप से आर्थिक रणनीति, फंड मोबिलाइजेशन और रिकंस्ट्रक्शन पोर्टफोलियो में योगदान के लिए चुना गया है, क्योंकि विश्व बैंक के प्रमुख के तौर पर उनके पास वैश्विक विकास फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का गहरा अनुभव है।

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