चंडीगढ़
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की पावर यूटिलिटीज को सेवा गुणवत्ता के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक (सीएसआई), बैलेंस्ड स्कोरकार्ड सिस्टम लागू करने और सभी पावर यूटिलिटीज के लिए आईएसओ प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है।
एचईआरसी के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने राज्य सलाहकार समिति (एसएसी) की 33वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि अब एसएसी की बैठक वर्ष में तीन बार आयोजित की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि एसएसी की बैठकों में लिए गए सभी निर्णयों को पावर यूटिलिटीज द्वारा समयबद्ध ढंग से लागू किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में एचईआरसी के सदस्य मुकेश गर्ग और शिव कुमार, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डॉ. बी. आर. कंबोज , एचईआरसी के सचिव प्रशांत देष्टा, विद्युत लोकपाल आर. के. खन्ना व एचपीजीसीएल, एचवीपीएन, यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य एसएसी सदस्य उपस्थित रहे।
आयोग ने सभी पावर यूटिलिटीज को निर्देश दिया कि वे तीन माह के भीतर सुव्यवस्थित उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक (सीएसआई) लागू करें, जिसकी मासिक निगरानी की जाएगी। यह स्पष्ट किया गया कि सीएसआई का मूल्यांकन सेक्शन स्तर पर जूनियर इंजीनियर से लेकर उप-मंडल, मंडल और यूटिलिटी स्तर तक किया जाना चाहिए, ताकि जवाबदेही तय हो और उपभोक्ता सेवाओं में प्रभावी सुधार हो।
लक्ष्य आधारित प्रदर्शन और प्रणालीगत सुधार को संस्थागत रूप देने के लिए अध्यक्ष ने चार माह के भीतर बैलेंस्ड स्कोरकार्ड प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। इसे एक रणनीतिक प्रदर्शन प्रबंधन उपकरण के रूप में अपनाया जाएगा, जिसके माध्यम से वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों प्रकार के लक्ष्यों का निर्धारण और उनकी निगरानी की जाएगी। प्रदर्शन संकेतकों की समीक्षा फील्ड स्तर से लेकर शीर्ष प्रबंधन स्तर तक की जाएगी, जिनमें उपभोक्ता संतुष्टि, संचालन दक्षता, सुरक्षा, हानियों में कमी, सेवा गुणवत्ता और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इसकी मासिक समीक्षा अनिवार्य होगी।
प्रक्रियाओं के मानकीकरण पर आयोग ने बताया कि हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) वर्तमान में राज्य की एकमात्र आईएसओ प्रमाणित यूटिलिटी है। आयोग ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन), उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) तथा डीएचबीवीएन को भी आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने के निर्देश दिए, ताकि पारदर्शिता, एकरूप प्रक्रियाएं और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां सुनिश्चित की जा सकें।
लागत अनुकूलन पर जोर देते हुए शर्मा ने हरियाणा पावर परचेज सेंटर (एचपीपीसी) की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता रेखांकित की, ताकि अल्पकालिक और मध्यम अवधि की बिजली खरीद में होने वाले वित्तीय नुकसान से बचा जा सके। उन्होंने उपभोक्ताओं पर अनावश्यक भार कम करने के लिए उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी।
बैठक के दौरान डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि एग्रीगेट टेक्निकल एवं कमर्शियल (एटी एंड सी) हानियों को और कम करने के लिए निरंतर उपाय किए जा रहे हैं। यह भी जानकारी दी गई कि यूएचबीवीएनऔर डीएचबीवीएन ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 51,156.71 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) का अनुमान प्रस्तुत किया है।









