भोपाल
एमपी में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) पहली बार सड़कों का अनिवार्य रूप से रोड सेफ्टी ऑडिट करवाने जा रही है। एनएचएआइ के एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निर्मित स्टेट हाई-वे सहित अन्य जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। जिसमें सड़कों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से विभिन्न मापदंडों में परखा जाएगा।
सुरक्षा के मापदंडों पर होगी परख
प्री-डिजाइन स्टेज से लेकर कंस्ट्रक्शन तक सेफ्टी का ऑडिट विभिन्न चरणों में किया जाएगा। उसके बाद सड़क की शुरुआत होने के बाद भी उसे सुरक्षा के मापदंडों पर फिर परखा जाएगा। जहां कमी सामने आएगी उसको दोबारा दुरुस्त किया जाएगा। ऑडिट के दौरान जो सड़कें विभाग द्वारा बनाई गई हैं उनकी खामियों को सुरक्षा कारणों के तहत चिह्नित किया जा रहा है।
40 हजार किमी सड़कों का कराया ऑडिट
PWD विभाग द्वारा बनाई गई प्रमुख मौजूदा सड़कों का भी विभाग द्वारा सेफ्टी ऑडिट करवाया गया। जिसमें प्रमुख रूप से 441 खामियां पाई गई हैं। इनमें से करीब 200 खामियां ऐसी थीं, जिनमें थोड़े बहुत सुधार की आवश्यकता रही। जिन्हें ठीक कर दिया गया। वहीं 200 से ज्यादा ऐसी भी गलतियां चिह्नित की गईं जिनमें कंस्ट्रक्शन से जुड़ा काम करना था। जैसे अंधा मोड़, क्यूकल अंडर पास और सेफ क्रॉसिंग का निर्माण करना, जिस पर भी विभाग द्वारा लगभग काम पूरा कर लिया गया है। सड़क हादसों को रोकने की दिशा में यह बड़ी पहल साबित होगी।
तकनीकी खामी के कारण नहीं होगी दुर्घटना
इसलिए रोड सेफ्टी ऑडिट पर विभाग का जोर रोड सेफ्टी ऑडिट से सड़क पर किसी तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसमें सड़क की डिजाइन, साइन बोर्ड, रोशनी, गति नियंत्रण, पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों की सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट्स का आकलन किया जाता है।
कई बार सड़कें बनने के बाद छोटी-छोटी खामियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं, जिन्हें ऑडिट के जरिए सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया नई सड़कों के निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और उपयोग में आने के बाद भी की जाती है।
तीन चरणों में ऐसे होगा सेफ्टी ऑडिट
1. प्री-डिजाइन स्टेज
-सड़क की आवश्यकता और स्थान का अवलोकन
– ट्रैफिक वॉल्यूम-वाहन के प्रकार
– स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसे प्वॉइंट का चयन।
2. डिजाइन स्टेज
-रोड चौड़ाई, -कर्व, ग्रेड और जंक्शन डिजाइन
-फुटपाथ, स्टॉप और अन्य ट्रैक
-ड्रेनेज, लाइटिंग, साइन बोर्ड और मार्किंग
-कंस्ट्रक्शन स्टेज वर्क जोन सेफ्टी
– बैरिकेडिंग और डायवर्जन
– रात की विजिबिलिटी और चेतावनी संकेत प्री-ओपनिंग
– सड़क खोलने से पहले निरीक्षण
– सभी साइन, मार्किंग और स्पीड ब्रेकर की जांच
– ब्लैक स्पॉट की पहचान पोस्ट-ओपनिंग
– दुर्घटना डेटा का विश्लेषण
– ट्रैफिक का अध्ययन
– सुधारात्मक उपाय









