हजारीबाग में बम विस्फोट से इलाके में दहशत, लापरवाही या साजिश की जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

हजारीबाग.

हजारीबाग के खिरगांव हबीबी नगर में हुए बम धमाके के बाद यह इलाका एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र के रडार पर आ गया है। विस्फोट में तीन लोगों की मौत के बाद केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों के बीच भी गंभीर मंथन शुरू हो गया है।

फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां सबूत जुटाने में लगी हैं। फोरेंसिक जांच, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह विस्फोट स्थानीय लापरवाही का नतीजा था या किसी बड़ी साजिश की कड़ी है। क्योंकि आप पहले विस्फोट की बड़ी घटना हो चुकी है इसलिए लोग इसे पुरानी घटना से जोड़कर भी देख रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

खिरगांव के हबीबीनगर की घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि शहर के भीतर मौजूद संवेदनशील इलाकों को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाता है या नहीं। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वर्षों से निगरानी में रहे क्षेत्र में इस तरह का विस्फोट कैसे हुआ।

खिरगांव इलाका पहले भी सुरक्षा कारणों से चर्चा में रहा है। बीते वर्षों में यहां कुछ मामलों में संदिग्ध गतिविधियों और गैरकानूनी तत्वों को पनाह देने के आरोप सामने आ चुके हैं, जिनकी जांच विभिन्न एजेंसियों ने की थी। अप्रैल 2016 में इसी क्षेत्र में बम बनाते समय हुए धमाके में छह लोगों की मौत ने पूरे राज्य को हिला दिया था। उस घटना के बाद इलाके पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद ताजा धमाके ने खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई इलाका लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है, तो वहां इस तरह की घटना का दोहराव गंभीर चूक की ओर इशारा करता है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं का सही विश्लेषण और समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक घटना के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन बार-बार ऐसे मामलों का सामने आना यह संकेत देता है कि संवेदनशील इलाकों में सतत और निष्पक्ष निगरानी की जरूरत है। राजनीतिक या अन्य किसी भी दबाव से मुक्त होकर यदि गहन तलाशी और जांच की जाए, तो कई अहम सुराग सामने आ सकते हैं।

विस्फोट के बाद खुफिया तंत्र हुआ सक्रिय
धमाके के बाद स्थानीय पुलिस के साथ-साथ खुफिया इकाइयां भी सक्रिय हो गई हैं। यह जांच की जा रही है कि विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री स्थानीय स्तर पर छिपाई गई थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल किसी भी अंतरराष्ट्रीय या बाहरी संपर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियां संभावित पहलुओं को खंगाल रही हैं।

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