राजस्थान बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स का पावरहाउस, हिंदुस्तान जिंक दिखा रहा राह

जयपुर
हिंदुस्तान जिंक, जो वेदांता ग्रुप की कंपनी है, राजस्थान में तेजी से विकास और रोजगार बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। कंपनी राज्य में पाँच खदानें और तीन स्मेल्टर चलाती है, जिससे राजस्थान देश का महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल्स केंद्र बनता जा रहा है।
पिछले 10 सालों में हिंदुस्तान जिंक ने राजस्थान सरकार को ₹35,865 करोड़ दिए हैं। सिर्फ वित्त वर्ष 2025 में ही कंपनी का योगदान ₹5,145 करोड़ रहा, यानी हर दिन लगभग ₹10 करोड़ राज्य की आर्थिक प्रणाली में जुड़ रहा है। कंपनी राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी वैल्यू बना रही है और पिछले दस वर्षों में कुल ₹1,52,992 करोड़ का योगदान दिया है। अपनी नई रणनीति HZL 2.0 के तहत कंपनी सिर्फ जिंक और चांदी ही नहीं, बल्कि कई तरह के महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन पर काम कर रही है।
2002 से कंपनी का उत्पादन काफी बढ़ा है—जिंक उत्पादन 2 लाख टन से बढ़कर 1 मिलियन टन से ज्यादा हो गया है। चांदी का उत्पादन भी 20 गुना बढ़ा है, जो सोलर और क्लीन एनर्जी के लिए बहुत जरूरी है। कंपनी को लगातार तीसरे साल दुनिया की सबसे सस्टेनेबल माइनिंग कंपनी का सम्मान मिला है और यह ICMM की सदस्य बनने वाली पहली भारतीय कंपनी है।
सामाजिक विकास में भी कंपनी सक्रिय है। 2016 से अब तक कंपनी ने ₹1,750 करोड़ समुदाय विकास में लगाए हैं, जिससे 2.3 मिलियन लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण और खेलों के जरिए मदद मिली है। कंपनी ने हाल ही में 23 ट्रांसजेंडर प्रोफेशनल्स को भी अपनी टीम में शामिल किया है।
आने वाले समय में रामपुरा-आगुचा में 250 KTPA मेटल्स कॉम्प्लेक्स और देश के पहले 10 MTPA टेलिंग रीप्रोसेसिंग प्लांट जैसे बड़े निवेश होने जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से राजस्थान का औद्योगिक और आर्थिक विकास और तेज होने की उम्मीद है।

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