₹48 लाख की चावल डील अटकी, एशियाई देश ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका

नई दिल्ली 

हर देश की अपनी कुछ सांस्कृतिक और लोक मान्यताएं होती हैं. इसकी वजह से वो किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करते हैं. ये न सिर्फ राजनीतिक बल्कि कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलाव ले आती हैं. कई बार ये सामने आ जाती हैं तो कई बार समझने पर पता चलता है कि जो दिख रहा है, वैसा है नहीं. कुछ ऐसा ही चल रहा है इस वक्त जापान में, जहां अमेरिका से साथ टैरिफ घटाने पर होने वाली एक डील होते-होते रुक गई.

550 अरब डॉलर के मेगा निवेश समझौते की प्रक्रिया अचानक ही रुक गई. जापान के कारोबार सलाहकार रयोसेई अकाजावा ने अमेरिका जाना था लेकिन उनका दौरा आखिरी मिनट में रद्द कर दिया. अकाजावा का यह दौरा अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक के साथ फाइनल बातचीत के लिए तय था. निवेश पैकेज की घोषणा इसी हफ्ते की जानी थी, जिसमें मुनाफे के बंटवारे जैसी अहम बातें तय होनी थी.

क्या है ये पूरा निवेश समझौता, जो थम गया

अमेरिका और जापान के बीच सहमति बनी थी कि अगर जापान यह 550 अरब डॉलर का मेगा इनवेस्टमेंट करता है, तो टोक्यो पर लगने वाले टैरिफ 25% से घटाकर 15% कर दिए जाएंगे. हालांकि इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा – ‘यह पैसा हमारा है, हम जैसे चाहें वैसे लगाएंगे’. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस इनवेस्टमेंट का 90 फीसदी मुनाफा अपने पास रखेगा, बस यहीं जापान की बात बिगड़ गई. जापानी सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति नहीं बनने की वजह से दौरा रद्द किया गया है. इसमें ऑटो पार्ट्स पर तुरंत टैरिफ हटाना और पुराने कार्यकारी आदेश में बदलाव करना शामिल है.

‘चावल’ का है अहम रोल

इस पूरे मामले में अहम भूमिका जापानी चावल की है. दरअसल जापान और अमेरिका के समझौते की प्रक्रिया मई से ही चल रही है. अब मु्द्दा ये है कि डोनाल्ड ट्रंप हमेशा की तरह अपनी शर्तों पर निवेश चाहते हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ये भी लिख दिया था कि जापान ने अमेरिका के लिए अपना एग्रीकल्चर सेक्टर खोल दिया है. यहां मामला सीधा चावल से जुड़ा था. जापानी किसान कभी नहीं चाहते हैं कि अमेरिका का चावल जापानी बाजारों में आए, जिसे लेकर पहले भी विरोध हो चुका है. दशकों से यहां अमेरिकी चावल का विरोध होता रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि ये सस्ता चावल किसानों के बाजार को खत्म कर देगा. जापानी लोग स्टिकी राइस खाते हैं और वे इसे पौष्टिक मानते हैं. दूसरी तरफ चावल जापान में सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. जापानी लोग इसे अपने गांव से जोड़कर देखते हैं. भले ही जापान में बाकी भोजन आयात होता हो लेकिन उनकी कोशिश रहती है कि चावल घरेलू उत्पादन तक ही सीमित रहे, भले ही उनकी कीमतें ज्यादा हों.

जापान का चावल आयात

वैसे तो जापान में चावल का आयात होता लेकिन अमेरिकी चावल का ज्यादा विरोध है क्योंकि ये सस्ता होता है. जापान टैरिफ बढ़ने की सूरत में जापान से चावल का आयात कम कर चुका ह, जिसे अमेरिका बढ़ाना चाहता है. वहीं भारत का जापान में चावल का निर्यात पिछले दो सालों में बढ़ा है. साल 2024 में जापान ने भारत से $5.74 मिलियन का चावल आयात किया जो साल 2023 ( $2.08 मिलियन) की तुलना में दोगुने से ज्यादा था. ऐसे में अमेरिका से अगर जापान चावल आयात नहीं करता, तो भारत से उसकी डील हो सकती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Post

Live Cricket Update

You May Like This

error: Content is protected !!

4th piller को सपोर्ट करने के लिए आप Gpay - 7587428786