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553.85 लाख की लागत से बनी ग्राम रनई की 6 किमी सड़क महज़ 6 महीने में उखड़ी –
👉 ठेकेदार की घटिया निर्माण गुणवत्ता उजागर।
👉 C.C. रोड पर लगे बोर्ड में गड़बड़ी – 2022 में पूर्ण, लेकिन काम 2025 में!
👉 जनपद CEO व कलेक्टर की चुप्पी से ग्रामीणों में गुस्सा, ठेकेदार पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं।
जनता का सवाल – क्या ठेकेदार सरकार चलाएंगे या जनता द्वारा चुनी सरकार जवाब देगी?
🚨 6 महीने पुरानी सड़क क्यों उखड़ रही? 3 साल पुराने कागजों पर करोड़ों का खेल! शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
कोरिया/बैकुंठपुर।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत रनई, बंधवा पारा, वार्ड क्रमांक 14, तहसील पटना, जिला कोरिया में बनी 6 किलोमीटर लंबी सड़क महज़ 6 महीने में ही जगह-जगह से उखड़ चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सड़क घटिया निर्माण और विभागीय मिलीभगत का जीता-जागता सबूत है।
हैरानी की बात यह है कि स्थल पर लगाए गए CGRIDCL (लोक निर्माण विभाग) बोर्ड में स्पष्ट उल्लेख है कि यह सड़क वर्ष 2022 में ही पूर्ण हो गई थी। यानी, कागजों में 3 साल पहले काम पूरा दिखाकर ठेकेदार और अफसरों ने अपनी जेबें भर लीं, जबकि असलियत में सड़क का निर्माण 2025 में कराया गया।
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⚠️ ठेकेदार की पहुंच या विभाग की लाचारी?
जब ग्रामीणों ने घटिया सड़क की शिकायत की, तो कार्यपालन अभियंता का चौंकाने वाला बयान सामने आया –
> “ठेकेदार बहुत पहुंच वाला है, हम सिर्फ नोटिस दे सकते हैं, बनवाना उसकी मर्जी है।”
इस जवाब से यह साफ है कि विभाग ठेकेदार के सामने बेबस और लाचार है। जबकि हकीकत यह है कि:
सड़क बनने के बाद 5 साल तक रखरखाव ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है।
लेट फाइन (Penalty) की वसूली विभाग को करनी होती है।
गुणवत्ता परीक्षण और लैब रिपोर्ट अनिवार्य है।
अब सवाल उठता है कि –
2022 में पूर्ण दिखाए गए काम का भुगतान किस आधार पर किया गया?
2025 में पुनः काम कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या बढ़ी हुई दरों पर नया बिल पास कर करोड़ों की हेराफेरी हुई?
क्या कलेक्टर और CEO जनपद पंचायत ने आँखें मूंद रखी हैं?
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💰 553.85 लाख का प्रोजेक्ट, 6 महीने में बर्बाद!
इस सड़क निर्माण पर 553.85 लाख (लगभग 5.5 करोड़) की स्वीकृति थी। लेकिन भारी-भरकम बजट के बावजूद सड़क 6 महीने भी नहीं टिक सकी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मोटाई आधी डाली गई, घटिया सामग्री इस्तेमाल की गई और गुणवत्ता परीक्षण सिर्फ कागजों पर हुआ।
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🕵️ जांच के लिए प्रमुख बिंदु (CGRIDCL नियम अनुसार):
1. निर्माण तिथि व भुगतान की जांच – 2022 में पूर्ण दिखाए गए काम का पैसा किसे और कब दिया गया?
2. लेट फाइन वसूलने की कार्यवाही – 3 साल लेट डिलीवरी पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया गया?
3. गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट – क्या लेयर, मोटाई और डामर की जांच लैब में हुई?
4. डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड – 6 महीने में सड़क टूटने पर ठेकेदार से मरम्मत क्यों नहीं करवाई गई?
5. ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया – घटिया काम के बावजूद ठेकेदार को क्यों बचाया जा रहा है?
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🔥 जनता का सवाल – शासन में ठेकेदार हावी या कानून?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन चुप रहा तो यह साबित हो जाएगा कि –
ठेकेदारों की पहुंच मुख्यमंत्री और मंत्रियों तक है।
अधिकारी सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति कर रहे हैं।
कलेक्टर और CEO जनपद पंचायत की भूमिका संदेहास्पद और कमजोर है।
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📹 संलग्न वीडियो: सड़क की बदहाली और जगह-जगह उखड़ चुके हिस्सों का वीडियो इस खबर के साथ संलग्न है, जो भ्रष्टाचार की पोल खोलता है।
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📝 निष्कर्ष
यह मामला केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि कागजी हेरफेर, विभागीय भ्रष्टाचार और करोड़ों के गबन का है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि तत्काल तकनीकी और वित्तीय जांच कराए, ठेकेदार और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो। अन्यथा यह साफ हो जाएगा कि सरकार की नजरों में जनता की तकलीफ नहीं, बल्कि ठेकेदारों का मुनाफा ज्यादा अहम है।