छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बदलाव की आहट, महासमुंद विधायक विनोद सेवक चंद्राकर का नाम सबसे आगे, “ग्रासरूट राजनीति का चेहरा, कांग्रेस संगठन की नई उम्मीद”

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बदलाव की आहट, महासमुंद विधायक विनोद सेवक चंद्राकर का नाम सबसे आगे

रायपुर/महासमुंद।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पार्टी हाईकमान संगठनात्मक स्तर पर नए नेतृत्व की तलाश में है। ऐसे में महासमुंद जिले से कांग्रेस विधायक विनोद सेवक चंद्राकर का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि चंद्राकर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की पूरी संभावना है।

जमीनी राजनीति से लेकर विधानसभा तक का सफर

विनोद सेवक चंद्राकर का राजनीतिक सफर बेहद जमीनी रहा है। वे लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े हुए हैं और पार्टी की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुँचाने का काम किया है। कार्यकर्ता राजनीति से शुरुआत करने वाले चंद्राकर अपनी सहजता और सादगी के कारण जनता में लोकप्रिय हैं।
महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में उन्होंने स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाया और जनता से लगातार संवाद बनाए रखा। यही वजह है कि उन्हें एक ग्रासरूट लीडर माना जाता है।

संगठन को ऊर्जा देने की क्षमता

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि विनोद सेवक चंद्राकर को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलती है तो वे संगठन को नई ऊर्जा दे सकते हैं। उनकी छवि एक मिलनसार और ईमानदार नेता की है। वे प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं के बीच लगातार संपर्क बनाए रखते हैं और हर वर्ग के साथ खड़े दिखाई देते हैं।

राजनीतिक समीकरणों में फिट

छत्तीसगढ़ कांग्रेस इस समय संगठन को पुनर्गठित करने की प्रक्रिया में है। ऐसे में पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत है जो न सिर्फ कार्यकर्ताओं को जोड़ सके बल्कि विपक्ष के खिलाफ मजबूत रणनीति भी तैयार कर सके। चंद्राकर का अनुभव और जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें इस पद के लिए और भी मजबूत उम्मीदवार बनाता है।

कार्यकर्ताओं में उत्साह

विनोद सेवक चंद्राकर का नाम संभावित प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उभरने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। कांग्रेसजन का कहना है कि वे एक ऐसे नेता हैं जो सुलभ और सहज हैं तथा हमेशा जनता और संगठन के बीच खड़े रहते हैं।

फैसला हाईकमान पर

हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान को लेना है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यदि चंद्राकर को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलती है तो आने वाले समय में पार्टी को इससे बड़ा लाभ हो सकता है।

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